हर लड़ाई लड़नी
ज़रूरी नहीं होती
हम सब अक्सर एक ही गलती को बार-बार दोहराते रहते हैं। क्यूंकि हम हर जगह, हर समय, और हर किसी के सामने इसी बात को साबित करने की कोशिश मे लगे रहता है कि हम सही हैं। लेकिन सच्चाई इससे अलग है हमारी जीत वही होती है जब हम सही लड़ाई चुनते है, बाकि जगह हम सिर्फ अपनी ऊर्जा, समय और मानसिक शांति ही खराब करते है।
एक लाइन आप सबने सुनी होगी कि अपनी लड़ाइयाँ समझदारी से चुनो। यह ज़िन्दगी का वह नियम है जो ज़िन्दगी को आसान बनाता है। एक असली योद्धा वही है जो सही लड़ाई चुनता है। क्योंकि हर लड़ाई में उतरना मजबूती नहीं अनाड़ीपन होता है और सही लड़ाई लड़ने वाला खिलाडी होता है।
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लड़ाई सिर्फ तलवार की नहीं, मन की भी होती है
हम हररोज बहुत सारी लड़ाइयाँ लड़ते हैं जैसे कि :
- जब कोई मुश्किल बात पूछ ले, उस बात का सही जवाब देने की
- दूसरों की नजरो मे खुद को सही साबित करने की
- जब वहुत गुस्सा आये उसको शांत करने की
- सोशल मीडिया पर अनजान लोगो से बहस करने की
- रिश्तो को जीतने और बचाये रखने की
ये सब लड़ाइयाँ तलवार से नहीं, मन से लड़नी पड़ती हैं। और कई बार इससे मन थक जाता है। लेकिन हम फिर भी रुकते नहीं बस लड़ते रहते है, क्योंकि हमें लगता है अगर मैंने जवाब नहीं दिया तो मैं हार जाऊंगा। कोई भी हारना नहीं चाहता मगर असली जीत जवाब देने मे नहीं, सही चीज़ चुनने मे है।
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लोगों को समझाने की सबसे बेकार लड़ाई:
दुनिया मे तीन तरह के लोग होते हैं:
- जो समझने के लिए सुनते हैं
- जो जीतने के लिए सुनते हैं
- जो सिर्फ जवाब देने के लिए सुनते हैं
पहली तरह के लोग कम होते है, क्यूंकि वो सामने वाले की बात को समझ कर फैसला लेते है या उनको सलाह देते है। दूसरी तरह सामान्य होते है, क्यूंकि वो सामने वाली की बात सुनते है और ताकि वो जीत सके, और तीसरी तरह के लोग बड़ी समस्या होते है, क्यूंकि वो सामने वाले की बात सुनते ही नहीं बस अपनी बात को सही साबित करना चाहते है।
एक बात याद रखें अगर सामने वाला समझने की तैयार नहीं है, तो आप कितना ही अच्छा जवाब दे दो वह नहीं समझने वाला और ऐसी लड़ाई का कोई फायदा नहीं। किसी को कहते सुना था कि, "किसी ज़िद्दी इंसान को समझाना ऐसा है जैसे आग पर पेट्रोल डालकर बुझाने की कोशिश करना।”
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ईगो कि लड़ाई:
कभी-कभी हम ना चाहते हुए ऐसी लड़ाई का हिस्सा बन जाते है, जो हम शुरू नहीं करते। उसकी वजह होती है हमे किसी कि बात बुरी लग जाती है जैसे किसी ने तना मार दिया,किसी के सामने बेइज्जती कर दी, फिर हमने बहुत तेज गुस्सा आता है, फिर हम सोचते है कि “अब तो मैं इसे दिखाऊँगा!” या “अब मैं चुप नहीं रहूँगा।”
यह हमारे दिमाग मे हलचल मचा देता है। लेकिन अगर रुककर सोचे इससे मिला क्या? सुकून या तनाव? मन कि शांति या बेचैनी? अगर इस लड़ाई को जीतने मे जब सफल हो भी जाते है, हम कुछ ना कुछ जरूर खो देते है जैसे कोई खास रिश्ता, दोस्ती या फिर अपने मन की शांति।
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किसी का गलत साबित करना:
कभी-कभी हम खुद को सही साबित करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते है और उसमे इतना समय लगा देते है। बिना यह सोचे की इसका कुछ फायदा होगा या नहीं? कई लोग केवल इसीलिए बहस करते है क्योंकि उन लगता है की आखरी शब्द उनके होने चाहिए।
लेकिन सोचने वाली बात है, किसी को गलत साबित करके कोई ट्रॉफी नहीं मिलती और ना ही कोई मेडल। बहस जीतकर आप सिर्फ लोगो को अपने खिलाफ कर सकते हो। अगर आप मान लो वो गलत है और चुप-चाप अपना काम करते रहे तब आप लोगो की इज़्ज़त पाते है।
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कहानी: किसान, तितली और तूफ़ान
एक गांव मे एक किसान रहता था। वह बहुत मेहनती, ईमानदार था, लेकिन वह बहुत गुस्से वाला था और हर छोटी-छोटी बात पर भड़क जाता था। वह सोचता था कि अगर वह खुद को सही साबित कर देगा, लोग उसकी इज़्ज़त करेंगे।
एक दिन खेत का मजदूर समय से लेट हो गया, वह उससे घंटो तक बहस करता रहा। अगर कभी दुकानदार एक रुपया ऊपर-नीचे कर देता, वह मरने-मारने को हो जाता। उसके इस व्यहवार को देखकर उसकी माँ उसको रोज समझाती कि, "बेटा, हर बात पर तलवार निकालोगे, तो जख़्मी तुम ही होगे।”
एक दिन सारा दिन काम करने के बाद भी वह लोगो से झगडे ही कर रहा था। उसकी माँ उसको दूर खड़ी देख रही थी। वह उसके पास आयी और बोली, "देखो, उस तितली को।" जो हवा के झोंकों से लड़ रही थी, लेकिन हर बार गिर जाती थी।
उसकी माँ बोली,"देखो, यह तितकी हवा से लड़ रही है और इस बात को नहीं समझ पा रही की हवा उसकी दुश्मन नहीं है।" अगर तुम भी हर छोटी लड़ाई मे अपना पूरा जोर लगा दोगे, बड़ी लड़ाई से कैसे निपटोगे?" यह बात किसान को समझ आयी की शांत रहना कायरता नहीं, बुद्धिमानी है। कुछ लड़ाइयाँ जीतने के लिए, कुछ लड़ाइयाँ छोड़ने के लिए होती हैं।
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कुछ लड़ाइयाँ खुद से जीतनी होती है
एक बात याद रखने वाली है, कुछ लड़ाइयाँ दुनिया से नहीं हमे खुद से जीतनी पड़ती है जैसे:
- अपने गुस्से को नियंत्रण करने की
- अपनी ऊर्जा बचाकर रखने की
- अपने दिमाग को शांत रखने की
यह जानने की कब बात बोलनी है और कब चुप रहना है।
ये सब लड़ाइयाँ अकेले मे लड़नी पड़ती है, इन पर कोई शबाशी नहीं मिलती और ना तालियां बजती। लेकिन इन सब चीज़ो से रिश्ते और जीवन अच्छा हो जाता है।
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कहां लड़ाई करनी चाहिए?
हर जगह लड़ाई से बचने से लोग कायर समझने लगते है, इसलिए कुछ लड़ाइयां लड़नी भी पड़ती है जैसे:
1. अपनी इज़्ज़त के लिए: हर रिश्ते मे कुछ सीमाएं होती है, हर कोई चाहता है लोग उनकी इज़्ज़त करे। पर कोई उन सीमाओं को तोड़े, या आपकी बेजत्ती करने की कोशिश करे तब चुप नहीं रहना चाहिए। उनको उसी समय जवाब देना चाहिए ताकि उनको समझ आये वो अपनी सीमाएं तोड़ रहे है।
2. अपने सपनों के लिए: इंसान बचपन से बड़े होने तक बहुत सारे सपने देखता है। समय के साथ उसे समझ आता है कि सब इतने जरूरी नहीं थे। पर कुछ सपने ऐसे थे जिनके लिए मरना भी पड़े तो मंजूर है। उन सपनो के लिए लड़ना कमजोरी नहीं सच्चा साहस है।
3. गलत चीज़ों के खिलाफ: अगर कोई आपके साथ गलत करे तब चुप रहना खुद के साथ गलत करने जैसा है। यहाँ आवाज उठाना जंग नहीं, खुद के लिए इज़्ज़त कामना होता है। यह एक बड़ी जिम्मेदारी है जो उठानी ही चाहिए।
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कौन-सी लड़ाइयाँ छोड़ देनी चाहिए?
सब लड़ाइयाँ लड़ने से अपना ही समय खराब होता है, इसलिए कुछ लड़ाइयाँ छोड़ देना अपने लिए अच्छा होता है।
1. सोशल मीडिया की बहसें: आजकल सब लोग सुबह से शाम तक सोशल मीडिया इस्तेमाल करते है। एक पोस्ट पर लोग बहस शुरू कर देते और घंटो उसी मे लगे रहते है। यह बात समझने कि है कि लोग सिर्फ अपनी बात लिखते है, उनको फर्क नहीं पड़ता बात सही है या गलत।
2. बेवजह तर्क-वितर्क: तर्क-वितर्क करना अपनी समझ बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी होता है। लोग पुराने से समय से ये सब करते आ रहे है। परन्तु कुछ बातो मे अगर लोगो कि भावनाएं जुडी होती है उनके बारे मे तर्क देना सही नहीं होता। क्यूंकि वो दिल से सोच रहे होते है और आप जवाब दिमाग से देते हो।
3. उलझे हुए रिश्ते: रिश्ते तभी अच्छे लगते है, जब सब कुछ अच्छा चल रहा हो। पर जब रिश्तो मे थोड़ी भी गड़बड़ हो जाये, वो उलझते ही चले जाते है। जब रिश्तों मे जरूरत से ज्यादा खराब होते चले जाये, और कोई बात समझने वाला ना हो उन रिश्तो को खत्म करना ही सही होता है
4. चलते-फिरते लोगो की राय: दुनिया मे बहुत सारे लोग है और सबकी अलग-अलग राय होती है। कुछ आपके साथ मिलती है और कुछ लोगो से नहीं। अगर सारे लोगो खुश करना चाहते हो वो मुमकिन ही नहीं है। इसलिए जो खास हो उन्ही से राय लो और उन्ही को राय भी दो।
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अपनी लड़ाइयाँ चुनना कैसे सीखें?
हर कोई इंसान हर काम नहीं कर सकता। उसे सब कुछ सीखना पड़ता है, इसी तरह अगर हर लड़ाई नहीं लड़नी है तो सीखना होगा कि उनको कैसे चुना जाये:
1. रुककर सोचें – क्या यह लड़ाई जरूरी है?: जब भी कभी लड़ाई हो, कुछ पल के लिए रुकना हमेशा फायदेमंद होता है। जिस वजह से लड़ाई शुरू हुई ये सोचना की इसको लड़ने से मेरा कुछ लम्बे समय मे फायदा होगा तो जरूर लड़नी चाहिए। अगर कोई फायदा नहीं सिर्फ समय का नुकसान होगा उसी समय उस चीज़ को छोड़ देना अच्छा है।
2. सामने वाले की नीयत समझें: यह थोड़ा मुश्किल होता है, क्यूंकि कुछ लोगो की नीयत का कभी-कभी पता नहीं लगता। पर जब उसकी नीयत का पता लग जाये तब उसके अनुसार हम भी खुद मे बदलाव कर सकते है। इसलिए किसी से लड़ाई लड़ने से उसकी नीयत समझना अच्छा फैसला हो सकता है। उससे लड़ाई से पहले ही आप आधी जंग जीत लोगे।
3. भावनाओं में रहकर निर्णय न लें: जो इंसान अपनी भावनाओं पर नियंत्रण कर सकता है वो कुछ भी कर सकता है, फिर सामने वाला उसको कितना ही उकसा ले। क्यूंकि एक बार जो फैसला लेकर काम कर दिया, उसका नतीजा नहीं बदल सकता। जब कभी किसी मे गुस्से से आप वो शब्द बोल दे जो उन्होंने बताए हो तो उनका भरोसा टूट जाता है और एक बार का गुस्सा सालो के प्यार को खत्म कर सकता है।
4. अपनी ऊर्जा बचाएँ: जिस तरह दूर का सफर तय करने के लिए ऊर्जा कि जरूरत होती है उसी तरह जीवन मे अपने दिमाग और शरीर को भी ऊर्जा कीजरूरत होती है। इसलिए अपनी क्षमताओं, मानसिक संतुलन और समय को हमेशा बचाकर रखना चाहिए। कभी ऐसा नहीं हो आपको उसकी जरूरत हो और आपके पास ऊर्जा ही न हो।
5. बात को बढ़ाएँ नहीं: बात को सालो साल भी बढ़ाया जा सकता है और कुछ पल मे खत्म भी किया जा सकता है। जब भी किसी लड़ाई मे आप होते हो, कुछ आप बोलते हो कुछ सामने वाला बोलता है और इससे लड़ाई और बढ़ती है खत्म नहीं होती। लेकिन उसकी जगह आप चुप हो जाये और उस जगह से चले जाओ तो आप खुद को लड़ाई से अलग कर लेते हो। कभी-कभी समय को मौका देना चाहिए की वो आपकी जगह जवाब दे।
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निष्कर्ष
अंत मे मैं बस इतना ही कहना चाहता हूँ की जीवन मे दो तरह की लड़ाइयाँ मिलेंगी एक जो आपको हर काम करने के लिए मजबूत बना देगी और दूसरी आपकी शारीरिक और मानसिक तौर पर थका देगी। आपको ही पहचान करनी पड़ेगी की कौनसी लड़ाई ज्यादा जरूरी है। जो मजबूत बनाएगी या थका देगी?
युद्ध के समय सबसे बुद्धिमान योद्धा वह नहीं जो हर लड़ाई जीतता है, बल्कि वह है जो जानता है कि किस फैसले से मैं लड़ाई जल्दी खत्म कर सकता हूँ। आपको भी जीवन मे यही सीखने कि जरूरत है जो काम करने से आपका जीवन आसान होगा उसको पहले करना चाहिए।
“मन की शांति जीतने से मिलती है, हर लड़ाई लड़ने से नहीं।”
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