If the world forgets you, don’t forget yourself.
If the world forgets you, don’t forget yourself.
क्या आप भी कभी ऐसा महसूस करते है कि आपके आस-पास कोई नहीं है? ऐसा लगता है जैसे दुनिया की सारी खुशियां, सारे रिश्ते और सारे सुख कहीं दूर चले गए है। आप अपने जीवन मे एक खालीपन महसूस करते हो जो भीड़ मे भी आपका पीछा नहीं छोड़ता। ऐसे मे घबराना नहीं है और खुद से कहना है कि "अगर कोई मुझ से प्यार नहीं करता,तो मैं खुद से तो प्यार कर सकता हूँ।"
यह शब्द कहने मे जितने आसान लग रहे है, असल मे हैं नहीं। यह किसी गुरु द्वारा दिया हुआ मंत्र नहीं, बल्कि जीवन का एक मुश्किल, परन्तु सबसे सुन्दर सच्चाई है। खुद से प्यार करना कोई स्वार्थ नहीं, बल्कि यह आत्म-सम्मान की नींव है। जब तक आप अपने को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर लेते, दुनिया का कोई भी प्यार आपके जीवन मे खालीपन को नहीं भर सकता।
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बाहरी प्यार की भूख
जिस समाज और परिवेश मे हम रहते है, वह बचपन से सिखाता है कि प्यार हमेशा बाहर से मिलता है। जैसे माता-पिता का प्यार, दोस्त का प्यार, जीवनसाथी का प्यार और हम सब खुश होने के लिए इनका इंतज़ार करने लगते है। हमे लगता है कि ,"कोई मुझ से दोस्ती कर ले, मेरी थोड़ी सी तारीफ कर दे या अपने जीवन मे खास जगह दे दे, तो मैं खुश हो जाऊंगा। "यह एक ऐसी जाल है जिसमे हम खुद को फंसा लेते है।
जब हम अपनी ख़ुशी की चाबी किसी और के हाथ में दे देते हैं, तो हम हमेशा उनके मूड, उनकी इच्छाओं और उनकी उपलब्धता के गुलाम बन जाते हैं। क्या अपने कभी सोचा है कि एक छोटा सा बच्चा दिल से कैसे हंसता है? क्योंकि वह अपने आप में मस्त रहता है। उसे किसी के प्यार की पुष्टि की ज़रूरत नहीं होती और जैसे हम बड़े होते रहते है इस बात को भूलते जाते है।
स्वयं से प्यार का अर्थ
खुद से प्यार करने का मतलब यह नहीं की आप घमंडी हो जाये या दूसरों को इग्नोर करने लगे। स्वयं से प्यार का असली अर्थ है दूसरों के प्रति व्यवहार मे विनम्रता लाना। जैसे:
अपनी कमज़ोरियों को स्वीकार करना: यह बात समझ लो आप शक्तिमान नहीं है। आपमें कमियां हैं, आपसे गलतियां हो सकती है। खुद से प्यार करना इन कमियों के साथ जीवन शांत बनाना है, न कि उनके लिए खुद से नफरत करनी है।
अपनी ज़रूरतों को प्राथमिकता देना: जिस तरह आप घर मे आये मेहमानों का ख्याल रखते है की उनको किसी चीज़ की कमी न हो, उसी तरह अपनी नींद, अपने स्वास्थ्य, अपने मानसिक शांति का ख्याल नहीं रख सकते?
स्वयं के प्रति दयालु बनना: कोई आपके प्रति दयालुता ना दिखाए, आप खुद पर तो दिखा ही सकते हो। जब जीवन मे फेल हो जाए, तो अपने आप को कोसने की बजाय खुद को एक दोस्त समझकर बात करे।
अपनी सीमाएं तय करना: खुद की और दूसरों की सीमाएं तय करना बहुत जरूरी है। जो लोग या परिस्थितियां आपको दुखी करती हैं, उनसे दूर रहना भी खुद से प्यार का एक हिस्सा है।
एक कहानी: राजू और शीशा
एक गाँव में राजू नाम का एक लड़का रहता था। वह अक्सर बहुत दुखी रहता था। उसे हमेशा लगता रहता था की कोई भी उसे प्यार नहीं करता। गाँव मे भी लोग उससे ज्यादा बात नहीं करते थे और ना कोई उसके साथ रहता था। राजू हमेशा ही शिकायत करता रहता की "कोई मुझे पसंद क्यों नहीं करता? मैं जीवन मे अकेला क्यों हूँ?"
एक दिन, एक उसी गाँव मे एक साधु आये। राजू ने अपने सारे दुःख उनको सुनाये। साधु मुस्कुराए और उन्होंने राजू को एक शीशा देते हुए कहा, "बेटा, यह कोई साधारण शीशा नहीं है। इसमें तुम्हे वो इंसान दिखेगा जो तुम्हारे सारे दुखों का कारण है, और साथ ही तुम्हारी सभी खुशियों की चाबी भी है। उस इंसान की खोज करो और उससे दोस्ती करना सीखो।"
राजू ने उत्सुकता से आईना देखा। उसमें उसे अपना ही चेहरा दिखाई दिया। वह हैरान हो गया। उसे यह देख पहले तो बहुत गुस्सा आया और बोला "यह क्या मज़ाक है? मैं तो यही सोचता आया हूँ कि मेरे सारे दुखों का कारण कोई और है।"
राजू ने सोचना शुरू किया। क्या वह खुद को पसंद करता है? वह तो हमेशा खुद मे कमियाँ देखता है, खुद की दूसरों से तुलना करता था और खुद को कोसता रहता था। उसने कभी अपने अंदर की अच्छाइयों को नहीं देखा। उसका खुद के लिए यही नकारात्मक रवैया बाहर की दुनिया में भी दिखाई देता था। वह बहुत चिड़चिड़ा, शिकायत करने वाला और दुःख मे रहने वाला बन गया था। जिस वजह से लोग उससे दूर भागते थे।
राजू ने बदलने का फैसला लिया। उसने खड़े होकर शीशे मे खुद से बात करनी शुरू कर दी। शुरुआत मे उसे बहुत अजीब लगा, लकिन धीरे-धीरे उसने अपनी आँखों मे देखकर खुद से कहना शुरू किया कि "राजू, तू बहुत अच्छा है। तुझमें कमियाँ हैं, लेकिन तू सीख सकता है। और मैं तुमसे प्यार करता हूँ।"
उसने अपना ख्याल रखना शुरू कर दिया, अच्छी किताबे पढ़ी और खुद कि छोटी कामयाबी पर खुद को शाबाशी देना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उसके अंदर का खालीपन भरने लगा, उसके चेहरे पर ख़ुशी दिखने लगी। अब वह लोगो से मिलता तो शिकायत की बजाय सकारात्मक बातें करता था। लोगों ने महसूस किया कि राजू बदल गया है, और धीरे-धीरे लोग उसके आस-पास जमने लगे। उसे दोस्त मिल गए।
सीख: जिस इंसान को आप बाहर पूरी दुनिया मे ढूंढ रहे हो, वह आपके अंदर ही मौजूद है। उससे मिलिए, उससे बात करिये और उससे प्यार करिये।
खुद से प्यार करना कैसे शुरू करें?
यह काम एक दिन का या एक रात का नहीं है। इसका हररोज अभ्यास से होगा
- सकारात्मक आत्म-वार्ता (Positive Self-Talk): खुद से बात करना हमेशा अच्छा होता है। अपने मन मे चल रहे नकारात्मक विचारों को सुने। जब भी खुद से बात करे, " मैं यह नहीं कर सकता," तो उसे बदलकर कहें, "मैं इसे करने की कोशिश कर सकता हूँ " मैं कुछ नया सीख सकता हूँ।" खुद की तारीफ करे, चाहे छोटी सी सफलता ही क्यों न हो।
- खुद के साथ समय बिताएं (Spend Time with Yourself): आजकल लोग खुद से ज्यादा समय अपने फ़ोन के साथ बिताते है। अकेलेपन से डरें नहीं, उसका आनंद लेना सीखें। खुद की पसंद की एक अच्छी जगह पर घूमकर आये, अकेले सैर करने जाएं, अपनी पसंद का कोई काम करे। जब आपको अपना साथ पसंद आने लगेगा, तो आप कभी अकेला महसूस नहीं करोगे।
- शारीरिक देखभाल (Physical Care): आपका शरीर आपका मंदिर है। उसकी देखभाल करना खुद से प्यार करने की शुरवात है। पौष्टिक भोजन करें, पर्याप्त नींद लें, व्यायाम करें। जब भी इंसान शारीरिक रूप से अच्छा महसूस करता है, तो वह मानसिक रूप से भी बेहतर महसूस करता है।
- माफ़ करना सीखें (Learn to Forgive): आप माफ़ करके अपने दिल से बोझ उतारते हो। अपने लिए गलत फैसले, अपनों अफसलताओ और उन लोगो को जिन्होंने आपको दुःख दिए, सबको माफ़ कर दो। अपना बोझ उतार फेंकिए। यह आप अपने लिए कर रहे हैं, उनके लिए नहीं।
- "न" कहना सीखें (Learn to Say "No"): कुछ लोगो के साथ यह दिक्कत होती है वो किसी को भी ना नहीं बोल पाते। जो चीजें आपकी शक्ति खत्म करती है या वो लोग जो आपका जरूरत से ज्यादा फायदा उठाते हैं, उन्हें "ना" कहने का साहस जुटाएं। यह आत्म-सम्मान की निशानी है।
- कृतज्ञता का अभ्यास (Practice Gratitude): हररोज उन तीन चीजों के बारे में सोचें जिनके लिए आप भगवान के आभारी हैं, वह चाहे वे कितनी ही छोटी क्यों न हों। यह अभ्यास हमारी नजर कमियों से हटाकर भगवान द्वारा दिए आशीर्वाद पर केंद्रित करता है।
निष्कर्ष
जीवन एक लंबा सफर है, और इस सफर मे जो आपका सबसे अच्छा दोस्त है वो आप खुद हो। अगर आप इसी दोस्त के साथ दुश्मनी कर लोगे, तब यह सफर बहुत थका देने वाला और ज़िंदगी खराब करने वाला होगा। लेकिन आप अगर इस दोस्त से बनाकर रखोगे, और उसके साथ अच्छा व्यवहार करोगे, तो जीवन मे कोई साथ दे या ना दे, आपका सफर हमेशा ख़ुशी से भरा होगा।
याद रखिए, बाहरी प्यार एक इनाम है, जो अक्सर तब मिलता है जब आप अपने आप को प्यार करने लगते हो।
यह एक चुंबक की तरह काम करता है। तो आज से ही, इस पल से ही, वादा कीजिए – "मैं अपना सबसे अच्छा दोस्त बनूंगा। मैं खुद से प्यार करूंगा।"
क्योंकि, "जब तक आप अपने आप को प्यार नहीं करते, आप यह समझ ही नहीं सकते कि दूसरे आपसे प्यार करें या आप दूसरों से प्यार करें कैसे।"
Freedom
Small Start, Great Results
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