The Boomerang of Negativity
आप सभी पाठको को दिल से नमस्कार।
आज
फिर हाजिर हूँ,
एक नए ब्लॉग
के साथ। उम्मीद
करता हूँ यह भी आपको
बहुत पसंद आएगा।
आप कुछ नया सीखेंगे और अपने जीवन मे
बदलाव करेंगे।
हम सभी ने जीवन मे कभी न कभी बूमरैंग तो देखा होगा। उसका आकर इस तरह का होता है, जब भी उसे फेंकते है वह एक चक्कर लगाकर वापिस लौट आता है। अगर उसे सही तरीके से नहीं फेंका, वह वापसी मे फेंकने वाले को ही चोट पहुँचा सकता है। हमारे जीवन मे हमारे विचार, शब्द और भावनाएँ भी एक तरह के बूमरैंग ही हैं। जो भी हम बाहर फेंकते है, वो चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक, वह किसी न किसी दिन हमारे पास लोटकर जरूर आता है। इसे ही "द नेगेटिविटी बूमरैंग" कहा गया है।
यह
कोई जादू-टोना
याअंधविश्वास नहीं है।
यह एक सार्वभौमिक
नियम है, जिसे
कर्म का सिद्धांत,
कारण-प्रभाव का
नियम, या बस जीवन का
एक कड़वा सच
भी कह सकते हैं। आज
हम गहराई से
समझेंगे कि यह नेगेटिविटी बूमरैंग कैसे
काम करता है,
यह हमारे जीवन,
रिश्तों, स्वास्थ्य और सफलता
को किस तरह प्रभावित करता है,
और सबसे महत्वपूर्ण,
हम इसके प्रभाव
से खुद को कैसे बचा
सकते हैं।
कहानी: गुरु और दो शिष्य
इसको
हम एक कहानी
के माध्यम से
समझने की कोशिश
करेंगे।
पुराने
समय की बात है, एक
गुरुकुल मे बहुत ही समझदार
और ज्ञानी गुरु
थे। उनके दो शिष्य थे
एक का नाम था धीरज
और दूसरे का
अशांत। धीरज जो था वह
शांत,मेहनती और
हमेशा दूसरों की
मदद करने वाला
था। अशांत का
तो उसके नाम
से ही पता लगता है,
वह असंतुष्ट, शिकायत
करने वाला और दूसरों में
कमियाँ निकालने वाला
था।
एक
दिन गुरु ने दोनों को
बुलाया और दोनों
को लकड़ी का एक-एक
बूमरैंग दिया। उन्होंने
कहा, "यह कोई
साधारण बूमरैंग नहीं
है। यह तुम्हारे
द्वारा सोचे और बोले गए
शब्दों को अपने अंदर समा
लेता है। उन्होंने
एक चेतावनी के
साथ दोनों को
बताया कि आज से एक
महीने बाद जो कुछ भी
तुम इससे बाहर
फेंकोगे, वही तुम्हारे
पास वापस आकर
लौटेगा। इसलिए बहुत
सावधान रहना।
धीरज
ने अपने स्वाभाव
के मुताबिक बूमरैंग
को संभालकर रख
लिया और अपने काम में
लग गया। अशांत
ने भी अपने स्वाभाव के मुताबिक
बूमरैंग कोने में
फेंक दिया और वह भी
अपने काम मे लग गया।
जैसे
ही अगली सुबह
हुई, अशांत ने
अपनी आदत के अनुसार शिकायतें
करनी शुरू कर दीं। "भोजन बहुत
बेस्वाद है," "यह
गुरुकुल बहुत उबाऊ
है," "मेरा साथ
देने वाला कोई
नहीं है।" वह
नकारात्मक बोलता और
बूमरैंग की ओर देखता। और
दूसरी तरफ धीरज
मुस्कुराता रहता और
अपनी छोटी-छोटी
चीजों में खुशी
ढूंढता और अपने साथ वालो
की सहयता करता।
इसी
बीच एक महीना
बीत गया। गुरु
ने अपने दोनों
शिष्यों को एक खुले मैदान
मे बुलाया। तब
गुरु बोले "अपने-अपने बूमरैंग
को जितना दूर
फेंक सकते हो,
फेंको।"
अशांत
ने अपनी पूरी
ताकत लगाकर पहले
बूमरैंग को फेंका।
बूमरैंग हवा में दूर तक
गया, लेकिन जैसे
ही वह वापस मुड़ा, वह
एक काले बादल
की तरह दिखने
लगा। वापस आते
ही उसने अशांत
पर कीचड़ और कूड़ा फेंकने
लगा, और लोगो की बुरी
बाते उसके कानो
मे गूंजने लगी।
वह बहुत डर गया और
एक खम्बे की
तरह खड़ा रहा।
अब
बूमरैंग फेंकने की
बारी धीरज की थी। उसने
बड़े प्यार और
आराम से बूमरैंग
को फेंका, लकिन
जब वह लौटा वह हवा
मे चमकता हुआ
लग रहा था और वापस
आते ही धीरज पर फूलों
की पंखुड़ियाँ बरसाने
लगा। उसके कानो
मे मधुर संगीत
बजने लगा अपने
आस-पास के लोगों की
हँसी और आशीर्वाद
सुनाई देने लगे।
उसके चेहरे पर
एक शांति और
संतुष्टि थी।
यह
देखकर गुरु मुस्कुराए
और बोले, "देखा,
बेटे? अशांत, तुमने
जो कुछ भी इस एक
महीने में सोचा
और बोला, उसकी
नकारात्मक ऊर्जा इस
बूमरैंग में जमा हो गई।
और आज जब तुमने इसे
फेंका, तो वह सब तुम
पर ही वापस आ गिरी।
और धीरज, तुम्हारी
सकारात्मकता तुम्हारे पास ही लौट आई।
यही जीवन का नियम है।"
यह
सुनकर अशांत एक
पल के लिए शर्मिंदा हुआ। उसे
अपनी गलती का एहसास हुआ
कि उसकी नकारात्मकता
का पहला शिकार
वह खुद ही होता है।
उसके बाद से उसने भी
अपने जीवन मे बदलाव किया
और दुसरो की
सहायता करने लगा।
नेगेटिविटी बूमरैंग के अलग-अलग रूप
हमारे
जीवन भी यह बूमरैंग कई तरह के रूप
लेकर आता है। आज हम
सबको एक-एक करके देखेंगे
और क्या किया
जा सकता है उस पर
विचार करेंगे:
- विचारों
का बूमरैंग: हम
सभी को पता है, हमारे
विचार ही हमारी
वास्तविकता का निर्माण
करते हैं। अगर
हम लगातार इस
बात को सोचते
रहे कि "मैं
इस साल फेल हो जाऊंगा",
"मुझ से यह
काम नहीं होगा",
या "यह दुनिया
मुझ से नफरत करती है"
तो हमारा दिमाग
इन्ही सब चीज़ो को अपनी
तरफ खींचना शुरू
कर देगा। जो
हमारे सभी डरों
और नकारात्मक विश्वासों
को सच साबित
करना शुरू कर देगा। यह
एक तरह की
Self-Fulfilling Prophecy बन जाती है।
इसी डर और नकारात्मकता की वजह से हमारा
जीवन आगे नहीं
बढ़ पाता और असफलता हमें
चारो तरफ से घेर लेती
है।
- शब्दों
का बूमरैंग: जैसे
शब्द आप दूसरों
को बोलते हो,
इंतज़ार करो वही शब्द आपको
भी सुनने को
मिलेंगे। आपके द्वारा
बोले गए शब्द जो दूसरे
को नीचा दिखाने
वाले,उनकी आलोचना
करने वाले या उनको गालियाँ
देने वाले थे,
एक दिन आपके
लिए ही परेशानी
बनेंगे। आपके व्यहवार
की वजह से लोग आपसे
दूर रहने लगेंगे,
आपकी कोई इज़्ज़त
नहीं करेगा, और
आपको जब किसी की जरूरत
होगी कोई आपके
साथ नहीं खड़ा
होगा। आपके बोले
शब्द ही आपके खराब रिश्तो
को वजह बनेंगे।
- कर्मों
का बूमरैंग: कर्म
वह है, जिसका
हिसाब-किताब सबको
देना होता है।
अगर किसी के साथ धोखा
किया, छल-कपट किया,
या उसे नुकसान
पंहुचाया, तो यह
विश्वास करना का बेवकूफी है, की उसका फल
नहीं मिलेगा। आज
नहीं तो कल आपका समय
आएगा, जब आपको आपके द्वारा
किये गए कर्मों
का फल मिलेगा।
जो अपने दिया
है भगवान भी
आपको वही देगा,
आज नहीं तो कल देगा,
इस नहीं तो उस रूप
मे देगा, वो
किसी को भी कभी भूलता
नहीं है।
- ऊर्जा
का बूमरैंग: हमारा
शरीर ऊर्जा से
चलता है, जैसी
हमारी ऊर्जा वैसी
ही हमारी सोच
हो जाती है।
कुछ लोग सकरात्मक
ऊर्जा वाले होते
है और कुछ नकारात्मकता ऊर्जा वाले।
नकारात्मकता एक संक्रामक
ऊर्जा है। जब भी आप
उदास, क्रोधित या
निराश होते हैं,
तो आप देखते
हो आपके आस-पास का
माहौल भी नकारात्मकता
हो जाता है।
लोग आपकी नकारात्मकता
ऊर्जा के कारण आपके साथ
रहना पसंद नहीं
करते। अकेले रहने
की वजह से जीवन मे
और अधिक नकारात्मकता
होने लगती है।
हमारी यह ऊर्जा
वापिस आकर हमें
ही अकेला और
दुखी करेगी।
नेगेटिविटी बूमरैंग का हमारे ऊपर प्रभाव
यह
जो बूमरैंग है,
जब भी वापिस
आता है, अपने
साथ जीवन का गहरा प्रभाव
भी लाता है।
- मानसिक
स्वास्थ्य: जब लगातार
हम अपने जीवन
मे नकारात्मक सोच
रखते है, उससे
हमारे जीवन मे विचार तनाव,
चिंता और अवसाद
होने लगते है।
हम सोचते तो
है इस नकारात्मक
को दूसरों की
तरफ फेंकने की,
पर भूल जाते
है उसका पहला
शिकार हम हो रहे है।
- शारीरिक
स्वास्थ्य: विज्ञान ने भी इस बात
को साबित किया
है कि chronic stress और
नकारात्मक सोच की
वजह से हाई ब्लड प्रेशर,
हृदय रोग और
immunity सिस्टम कमजोर होने
लगता है। हमारे
ही नकारात्मकता विचार हमारे
शरीर को जहर दे रहे
है।
- पेशेवर
जीवन: टीम मे एक भी
नकारात्मक व्यक्ति पूरी टीम
के हौसले तोड़
सकता है। वह हमेशा ही
नकारात्मक बाते करते
है। ऐसे लोगो
पर विश्वास भी
नहीं किया जा सकता, उन्हें
दूसरों के मुकाबले
मौके भी कम मिलते है,
और जीवन मे आगे बढ़ने
का सफर रुक सा जाता
है।
- आत्म-विकास: यह
जो नकारात्मकता है,
वह हमारी सोच
को सीमित कर
देती है। कुछ भी नया
सोचने से डर लगता है।
जिस वजह से हम जीवन
मे नए मौके देखना भूल
जाते है, कुछ भी नया
नहीं सीख पाते
और खुद को पहले से
बेहतर बनाने की
भी नहीं सोचते।
बचाव के उपाय: बूमरैंग को सही दिशा में कैसे फेंकें?
अच्छी
बात यह है कि जिस
तरह नकारात्मकता वापस
आती है, उसी तरह सकारात्मकता
भी वापस आती
है। हमें बस अपने जीवन
मे बूमरैंग फेंकने
के तरीके को
बदलने की जरूरत
है। आइये देखते
है किस तरह हम चीज़ो
को सही कर सकते है।
- विचारों
की शक्ति को
पहचानें: हमें जो
कम सबसे पहले
करना है, अपने
विचारो के प्रति
सजग होना है।
जब भी दिमाग
मे कोई नकारात्मक
विचार आए, उसे पहचानना होगा और उसे एक
सकारात्मक विचार से
बदलना होगा। जैसे
की "मैं यह
नहीं कर सकता"
की जगह कहें,
"मैं इसे करना
सीखूँगा।"
- Gratitude (कृतज्ञता) का अभ्यास
करें: अपने जीवन
का नियन बना
ले, रोजाना सोने
से पहले उन
3 चीजों के बारे में सोचें
जिनके लिए आप आभारी हैं।
यह एक छोटा सा अभ्यास
हमारे दिमाग को
नकारात्मकता से हटाकर
जीवन के सकारातमक
पहलुओं पर केंद्रित
कर देगा।
- दूसरों
की प्रशंसा और
मदद करें: जब
हम दूसरों के
कामो मे कमी नहीं मेहनत
देखते है, उनकी
दिल से तारीफ
करनी चाहिए। हमेशा
बिना किसी स्वार्थ
के लोगो की मदद करनी
चाहिए। यह सकारात्मकता
का सबसे शक्तिशाली
बूमरैंग है, जो हमेशा कई
गुना होकर वापस
आता है।
- अपने
शब्दों पर नियंत्रण
रखें: जो इंसान
अपने शब्दों पर
नियंत्रण कर लेता
है, वह जीवन मे बहुत
तरक्की करता है। एक
बार बोलने से
पहले सोच लेना
सही होता है।
कौनसा शब्द कहना
सही है? और क्या जरूरी
है? मेरी बातें
सामने वाले को चोट पहुँचा
सकती है? हमेशा
दूसरों को बेहतर
होने के तरीके
बताये, ना की उनको नीचा
दिखाए।
- अपने
आस-पास के माहौल को
बदले: हमारे ऊपर
माहौल का बहुत फर्क पड़ता
है, अगर नेगेटिव
माहौल मे रहेंगे,
हमारी सोच भी नेगेटिव हो जाएगी,
अगर पॉजिटिव मे
रहेंगे तब पॉजिटिव
हो जाएगी। अपने
आस-पास सकारात्मक
लोगों, प्रेरणादायक किताबों
और प्रेणादायक चीज़ो
को रखें। नेगेटिव
चीज़ो को अपने जीवन में
आमंत्रित न करें।
- माफ
करना सीखें: जो
दूसरों को माफ़ कर देता
है, वह खुद के लिए
ही अच्छा करता
है। क्यूंकि गुस्सा
और बदले की भावना को
पालना एक बूमरैंग
है जिसे हम लगातार अपनी
ओर फेंक रहे
होते हैं। दूसरों
को माफ करके
हम खुद को इस जहर
से मुक्त करते
हैं।
- वर्तमान
मे जीना सीखे:
जो कुछ समय बदलना है
वो वर्तमान ही
है। और जो वर्तमान मे रहकर सही काम
कर लेता है,
उसका असर उसके
भविष्य पर पड़ता है। योगा
और ध्यान करने
से हम इस कला को
सीख सकते है,
जो हमें इस नेगेटिव सोच के चक्रव्यूह से बाहर निकलने में
मदद कर सकता है।
निष्कर्ष
कहानी
मे जिस तरह अशांत नहीं
समझ पाया, उसी
तरह हममें से
भी बहुत से लोग नहीं
समझ पाते की हमारे दुखों
और समस्याओं की
मुख्य वजह हमारे
अपने विचार और
हमारे कर्म है।
हम हमेशा बाहरी
दुनिया को दोष देते रहते
हैं,यह भूलकर
कि हमारे भीतर
ही उस बूमरैंग
को फेंकने और
उसे वापस लौटाने
की शक्ति है।
अगली
बार जब मे दिमाग मे
नेगटिव विचार आये,
कोई गलत शब्द
बोलने हो वाले हो, या
किसी के प्रति
गुस्सा आ रहा हो, तब
एक पल रूककर
उस गुरु की और उस
बूमरैंग की कहानी
याद करें। अपने
आप से पूछें:
"क्या मैं यही
चाहूँगा कि यह चीज कुछ
समय बाद और भी ताकतवर
होकर मेरे पास
वापस आए?"
अपने
बूमरैंग को सकारात्मकता,
प्रेम, दया और ईमानदारी के साथ फेंकिए। विश्वास रखिए,
दुनिया की नियमावली
यही कहती है कि वह
बूमरैंग जरूर वापस
आएगा, लेकिन तब
वह आपके लिए
खुशियों, शांति और
सफलता का उपहार
लेकर आएगा। आपका
जीवन वही बन जाता है,
जो आप दुनिया
को देते हैं।
❤️❤️
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