Stop Lying to Yourself

Stop Lying to Yourself (खुद से झूठ बोलना बंद करो)

सभी पाठकों को दिल से सलाम

उम्मीद करता हूँ आपको मेरे ब्लोग्स अच्छे लगते होंगे और आप इनको अपने दोस्तों मे शेयर भी करते होंगे। इसी जोश और उत्साह के साथ मैं लिखता रहूंगा और आप लोग भी मेरा साथ ऐसे ही देते रहना।
आज एक नए टॉपिक के साथ आया हूँ, ताकि हम इस पर चर्चा कर सके और कुछ नया सीख सके।
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“खुद से झूठ बोलना बंद करो – टूटा हुआ आईना और अंधेरी रात में बैठा अकेला इंसान”

क्या आपने कभी बैठकर ऐसा सोचा है कि ज़िन्दगी मे सबसे बड़ा धोखा हमें कौन देता है? क्या वो लोग है? हालात है? समय है? या वो किस्मत है? परंतु सच यह है इनमे से कोई भी नही। सबसे बड़ा धोखा हम अपने आप को देते है।
हम सुबह से शाम तक किसी न किसी तरह खुद से झूठ बोलते रहते है, कभी अपने सपनों को लेकर, कभी अपनी कमज़ोरियों को लेकर, कभी जिम्मेदारियों से बचने के लिए। धीरे-धीरे हमें पता भी नहीं चलता कब हमारे यह झूठ सच बनने लगते है। जो बात हम खुद को बार-बार बोलते और समझाते है, हमारा दिमाग उसी बात को सच मानने लगता है
इस ब्लॉग को लिखने का मेरा मकसद इतना है कि आप खुद से ईमानदार बनना सीखे। जो इंसान खुद से ईमानदार है वह ज़िन्दगी मे बहुत सफलता पाता है, क्यूंकि वह अपनी कमजोरियों को जानता है और उनमे सुधार करता है। जिससे आधी लड़ाइयाँ वैसे ही खत्म हो जाती हैं।
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ऐसे झूठ जो हम हर रोज खुद से बोलते है

सारे झूठ एक ही तरह के होते है, अगर उन पर ध्यान न दिया जाये ज़िन्दगी तबाह कर सकते है:

  1. कल से करूँगा: यह एक झूठ सबसे प्रचलित है, काम को टालने का सबसे आसान तरीका। किसी का कल कभी आता नहीं और समय ऐसे ही निकल जाता है।
  2. मेरे पास समय नहीं है: यह बात अपने अक्सर लोगो को बोलते सुना है। सबके पास 24 घंटे होते है, वो अमीर हो या गरीब। बात सिर्फ प्राथमिकता समझने की है।
  3. मैं ठीक हूँ: आप किसी को देख रहे हो उसकी हालत बहुत खराब है पर वो फिर भी यही बात बोलता रहता है। यह समय खुद से सच बोलने का है, जिससे सही इलाज हो सकता है।
  4. मैं चाहता तो कर सकता हूँ: यह बात सच है, जो इंसान सोच सकता है वह सब कर सकता है। पर लोग इसको खुद के आलस को छुपाने के लिए इस्तेमाल करते है।
  5. लोग क्या कहेंगे?: इस बात को हमने खुद को बार-बार बोलकर खुद पर एक्स्ट्रा प्रेशर बना लिया है। पर असल मे लोग खुद मे इतने उलझे हुए है कि उनको फर्क नहीं पड़ता।
  6. मैं बदल जाऊँगा, बस थोड़ा टाइम दो: इस बात को सुनकर लोग अपने रिश्तो को कई मौके देते है। लेकिन समझने वाली बात यह है कि बदलाव समय से नहीं, सही फैसला लेने से आता है।
  7. मैं कोशिश कर रहा हूँ: यह बात सच मे कुछ लोग सच मे हर काम के लिए दिल से कोशिश करते है, पर कुछ लोग सिर्फ कोशिश करने का नाटक करते है।
“खुद से बोले जाने वाले 7 सबसे बड़े झूठ – कल से करूँगा, लोग क्या कहेंगे, मैं ठीक हूँ”

ये सब झूठ असल में एक ही चीज़ छुपाते हैं और वो है हमारी असली हकीकत और हमारी कमज़ोरियाँ।
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कहानी: आईने का सच

एक लड़का था, जिसका नाम राजू था। वह 26 साल का एक शांत, समझदार और जीवन मे बड़े सपने देखने वाला था। लेकिन उसकी एक गन्दी आदत थी वह हर बात पर खुद से झूठ बोलता था। जब भी कोई उससे पूछता कि तेरे सपने का क्या हुआ, वह जवाब देता है कि बस कर ही रहा हूँ, जल्दी ही पूरा हो जायेगा। जब भी कोई पूछता वो वैसे ही झूठ बोलता जिनके बारे मे ऊपर लिखा है।
लेकिन सच्चाई कुछ और थी, वह न तो अपने सपनों के करीब था और न ही वह अंदर से खुश था। एक दिन वह बहुत परेशान हो गया और खुद से कहता कि ज़िन्दगी मे अब मज़ा नहीं आ रहा (न नौकरी में, न रिश्तो मे और न खुद के साथ) वह खुद से गुस्सा हो गया और पार्क मे चला गया।
वह पार्क मे बैठा था, एक छोटी सी 5-6 साल कि बच्ची को खेलते हुए देख रहा था। अचानक उस बच्ची का खिलौना टूट गया और वह रोने लगी। राजू उसके पास गया और बोला की कोई बात नहीं खिलौना ही है, रोते नहीं है। छोटी बच्ची ने अपने आंसू को पोछते हुए बोला: अगर कोई चीज़ टूट जाये तो रोना चाहिए ना? और अगर दर्द हो तो बताना चाहिए ना?
राजू को उसके शब्द सुनकर एक झटका सा लगा जैसे किसी ने एक आईना तोड़कर उसके सामने रख दिया हो। वह सोच मे पड़ गया मैं क्यों नहीं रोता? मैं क्यों नहीं अपना दर्द बोलता? मैं क्यों हर बार खुद से कह देता हूँ कि सब ठीक है?
शाम को वह घर वापिस आया और आईने के सामने खड़ा हो गया। कुछ समय खुद को गौर से देखने लगा और उसने खुद से सच बोलना शुरू किया: हाँ, मैं खुश नहीं हूँ, हाँ, मैं अपने सपनों से भाग रहा हूँ, हाँ, मैं डरता हूँ, हाँ, मैं खुद से झूठ बोलता हूँ। जिसने उसकी ज़िन्दगी मे जादू सा काम किया।
जैसे ही उसने खुद की कमियों को देखा और उनको अपनाया उसकी ज़िन्दगी बदल गयी। वह अपना समय नयी चीज़े सीखने मे लगाता, लोगो की सहायता करता और अपने डर का डटकर सामना करता। कुछ समय बाद वह एक सफल इंसान बन गया। क्यूंकि उसने खुद से सच बोलना शुरू किया। आप भी खुद से सच बोलना शुरू करे, जादू होगा।

“आईने के सामने खड़ा लड़का पहली बार खुद से सच बोल रहा है – ज़िंदगी बदलने का पल”
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खुद से सच बोलना क्यों ज़रूरी है?

जिस तरह राजू ने खुद से सच बोला उसे एहसास हुआ की सच दर्द देता है पर सही दिशा भी तो देता है। राजू ने अपनी कमियों को समझना उनको स्वीकार किया और फिर खुद मे सुधार किया। जब आपको अपने सपनों का पता लगता है, आप उनको पूरा करने के लिए प्रयास करते हो। जब खुद की गलतियों का पता लगता है उनसे सीखते हो।
लोग सोचते है अगर खुद से सच बोलेंगे वो टूट जायेंगे, पर सच यह है कि उससे नयी शुरुआत होगी। जब आप ही खुद को रास्ता दिखाने वाले हो, कौन आपको गलत रास्ते पर डाल सकता है।

“खुद से सच बोलते ही जंजीरें टूट गईं – नई शुरुआत और उम्मीद की किरण”
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खुद से झूठ बोलने के नुकसान

जब तक खुद से झूठ बोलते रहोगे नतीजे नहीं मिलने वाले जैसे आप चाहते हो, बल्कि इससे नुकसान होगा जैसे:
  • आत्मविश्वास धीरे-धीरे खत्म हो जाता है।
  • काम मे देरी होती जाएगी।
  • आप अपने सपनों से दूर होते चले जाओगे।
  • मन का बोझ बढ़ता जायेगा।
  • मानसिक थकान और तनाव बढ़ता जायेगा।
  • अंदर ही अंदर खत्म होते जाओगे।
  • अपनी भावनाओ का गला घोटने लगोगे।
“खुद से झूठ बोलने की सजा – झूठों के पिंजरे में कैद इंसान”
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खुद से सच बोलना कैसे शुरू करें?

जैसे राजू के लिए खुद से सच बोलना जादू सा काम किया वैसे ही आपके लिए भी हो सकता है। उसके लिए कुछ काम करने पड़ेंगे :
  • अपनी गलतियों को नोट करें और उनमे सुधार करे।
  • अपने डर को समझे और उनको ख़त्म करे।
  • अपनी सपनों को साफ देखे ताकि वो पुरे हो।
  • बहाने बनाने बंद करे काम करना शुरू करे।
  • खुद से बात करे ताकि नए रास्ते खुल सके।
“सुबह-सुबह डायरी में खुद से सच लिख रहा लड़का – पहला कदम”
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निष्कर्ष

अगर आप अपनी ज़िन्दगी मे बदलाव चाहते ही, आगे बढ़ना चाहते हो और खुश रहना चाहते हो। तो शुरुआत दूसरों से नहीं, खुद से कीजिए। आप दूसरों कि ज़िन्दगी के बारे मे कुछ नहीं जानते आप अपनी के बारे मे जानते है। दूसरों कि ज़िन्दगी मे बदलाव करने से आपकी ज़िन्दगी मे कुछ खास फर्क नहीं आएगा पर आप अपनी ज़िन्दगी मे बदलाव करते हो तब बहुत कुछ बदल सकता है।
जो इंसान खुद को लायक समझता है, वह उसी तरह कि मेहनत भी करता है और अपने जीवन मे सफल भी होता है।

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