Failure is not an end, it is a new beginning

 फेलियर एक अंत नहीं, नई शुरुआत है

आजकल के दौर मे जहाँ इतनी प्रतिस्पर्धा है, फेलियर शब्द सुनते ही हमारे मन मे नकारात्मक विचार आने लगते है। हम फेल होने पर खुद की काबिलियत पर शक करने लगते है। लकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी की दुनिया के 95% सफलता पाने वाले लोग भी जीवन मे असफल हुए है। अगर सच माने फेलियर सफलता की पहली सीढ़ी है। यह हमें सिखाता है, हमे अपने जीवन मे मजबूत बनना है और मुश्किलों का डटकर सामना करना है। इस ब्लॉग मे हम पढ़ेंगे कि कैसे फेलियर के बाद दोबारा शुरुआत करना संभव है, बल्कि यह हमारे विकास के लिए अत्यंत आवश्यक भी है।
टूटी हुई सीढ़ी से ऊपर चमकती रोशनी तक का सफर – फेलियर सफलता की पहली सीढ़ी है

कहानी: राजू की असफलता से सफलता की और

राजू एक छोटे से गांव मे रहने वाला लड़का था जिसने दसवीं कक्षा मे पहली बार फेल होने का मेडल हासिल किया। उसके लिए यह किसी सदमे से काम नहीं था। इस बेइजत्ती के कारण वह पूरा साल अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से छिपता रहा। उसके पिता एक गरीब मजदूर थे जो दिन-रात मेहनत करके उसकी पढ़ाई का खर्च उठाते थे। फेल होने के बाद राजू को लगा जैसे उसने अपने माता-पिता के सब सपनों को तोड़ दिया हो।एक शाम वह अपने कमरे मे बैठा गम के सागर मे डूबा हुआ था, उसकी माँ ने आकर उसके सिर पर हाथ फेरा और कहा, "बेटा, जिंदगी एक परीक्षा नहीं, एक सफर है। फेल होना मंजिल नहीं, रास्ता बदलना है। तुम्हें बस अपनी गलतियों से सीखना है और आगे बढ़ना है।"माँ की यह बात राजू के दिल को छू गई। उसने अगले साल फिर से परीक्षा दी और वह इस बार अच्छे अंकों से पास हो गया। आगे पढ़ने के लिए उसे शहर जाना पड़ा जहाँ वह छोटे-मोठे काम करता और अपनी पढाई करता। आज राजू एक अच्छा शिक्षक है और अपने जैसे हज़ारो बच्चो की आगे बढ़ने के लिए रास्ता दिखा रहा है। राजू की कहानी, हमे जीवन का एक महत्वपूर्ण सबक सिखाती है: "हार तब होती है जब आप कोशिश करना छोड़ देते हैं, न कि जब आप फेल हो जाते हैं।"
गाँव का लड़का मिट्टी के दीये में पढ़ता हुआ – फेलियर के बाद नई सुबह की तैयारी

फेलियर क्या सच में बुरा है?

हमारे समाज ने फेलियर को एक कलंक की तरह देखा जाता है। हमे बचपन से ही हमें सिखाया जाता है कि सफल होना ही जीवन का एक मात्र लक्ष्य है और जो फेल हो गया वह अपने लक्ष्य से भटक गया। लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है, दुनिया के सबसे सफल लोग भी कभी न कभी फेल हुए हैं। जैसे कि थॉमस एडिसन बल्ब बनाने में 1000 बार फेल हुए, स्टीव जॉब्स को अपनी ही कंपनी से निकाला गया, और अमिताभ बच्चन को शुरुआत में कई फिल्म निर्माताओं ने रिजेक्ट किया।
फेलियर हमे सफलता का रास्ता दिखाता है, हमे बस उसको सही तरीके से देखने का हुनर विकसित करना है। जब हम किसी काम मे फेल होते है, तब हमे अनुभव होता है की हम गलती कहाँ कर रहे है। फेलियर हमें विनम्र बनाता है और हमारे चरित्र मे निखार लाता है। यह हमे सिखाता है की सफलता का रास्ता आसान नहीं है, इसके लिए कड़ी मेहनत और संघर्ष करना पड़ता है।
एडिसन, जॉब्स, बच्चन – फेलियर से उठकर सफलता तक का सफर (ब्लैक एंड व्हाइट से रंगीन तक)

फेल होने के बाद दिमाग की हालत?

फेल होने के बाद मन मे जो तूफान उठता है, वह शांत होने का नाम नहीं लेता। जिसका सीधा असर हमारे आत्मविश्वास पर होता है। हम खुद पर ही शक करने लगते है और अपने फैसले भी सही नहीं ले पाते, हमें डर लगता है कि क्या मैं यह काम कर पाऊंगा? लोग मेरे बारे क्या सोचेंगे, यह डर हमें और ज्यादा परेशान करने लगते है। हम अपने आने वाले भविष्य के बारे मे चिंता करने लगते है कि अब आगे क्या होगा? क्या मैं दोबारा कोशिश कर पाऊँगा?
इन सबके अलावा सामाजिक दबाव की भावना तो सबसे ज्यादा परेशान करने वाली होती है। हमें लगता है की लोग मज़ाक बनाएंगे, और परिवार को शर्मिंदा होना पड़ेगा। ये सब विचार आना स्वाभाविक हैं, लेकिन इन्हें हमें नियंत्रित करना सीखना होगा। हमें साथ मे यह भी सीखना होगा की यह सिर्फ एक बुरी घटना थी, जो दुबारा बेहतर करने का मौका देती है।
अंधेरे कमरे में निराश व्यक्ति, लेकिन खिड़की से आती एक किरण उम्मीद की

फेलियर के बाद दोबारा शुरू करने के 5 कारण

फेल होने के बाद दुबारा से शुरू तो करना पड़ेगा, हाथ पर हाथ रखकर बैठने से कुछ नहीं होगा। इस फेलियर से हम कुछ महत्वपूर्ण सबक ले सकते है:

  1. फेलियर हमें सिखाता है: जीवन मे छोटी या बड़ी हर गलती हमें कुछ न कुछ सिखाती है। गलतियां करने से ही हम जीवन मे नए अनुभव ले सकते है। जो इंसान कभी जीवन मे फेल ही नहीं हुआ, वह कुछ भी नया करने से डरता है और इस तरह वह अपने जीवन मे नई ऊँचाइयों को छूने से वंचित रह जाता है।
  2. नई दिशा मिलती है: जब हम एक ही काम करते रहे और बार-बार उसमे फेल होते रहे। तब हमें अपने अनुभव से समझने की कोशिश करनी चाहिए की गलती हो कहाँ रही है। फिर हम सोचते हैं कि क्या ये काम ऐसे ही करते रहना चाहिए या कोई नया तरीका देखना चाहिए?
  3. मानसिक मजबूती आती है: जो इंसान अपने फेलियर से उबर रहा होता हैं, वह खुद को भविष्य की चुनौतियों के लिए मानसिक रूप से मजबूत बनाता हैं। फेल होने वाले इंसान के अंदर के आंतरिक शक्ति का विकास होता है जो उसको भविष्य में आने वाली किसी भी कठिनाई का सामना करने में उसकी मदद करती है।
  4. विनम्रता का विकास: सफलता कई बार अपने साथ अहंकार लाती है। जबकि जिस इंसान ने अपने जीवन मे फेलियर देखा हो, वह कभी भी अहंकारी नहीं हो सकता। वह बहुत ही विनम्र स्वभाव का होता हैं। यह हमें सिखाता है कि जीवन में कुछ भी निश्चित नहीं है और हमें हमेशा सीखते रहना चाहिए।
  5. नई संभावनाएँ खुलती हैं: यह तो हम सबने सुना है कि भगवान एक रास्ता बंद करते हैं तो दूसरा खोल देते हैं। एक काम मे फेल हुए कोई बात नहीं, दुबारा कोशिश करेंगे। ऐसा करते रहने से हमें नयी संभावनाएं दिखती है, जिनके बारे शायद हमने पहले कभी सोचा भी नहीं था।

5 चमकते दरवाजे, एक खुला – फेलियर के बाद नई संभावनाओं का रास्ता

फेलियर के बाद दोबारा शुरू करने की रणनीति

फेलियर के बाद दोबारा शुरुआत करने के लिए एक नयी रणनीति की आवश्यकता होती है।

  1. स्वीकार करना: लोगो के लिए सबसे मुश्किल है यह मान लेना की वो फेल हो गए। पर इलाज इसी से होगा जब हम अपनी फेलियर को स्वीकार करेंगे। अगर इंकार करेंगे तब स्थिति और बिगड़ती है। स्वीकार करने से हम वास्तविकता को समझ पाते हैं और आगे का रास्ता तय कर पाते हैं
  2. विश्लेषण करना: अब जब फेलियर को स्वीकार कर लिया, अब समय है विश्लेषण करने का की गलती हुई कहाँ ? गलती समझने के बाद देखना कि हमने इससे क्या सीखा और अगली बार क्या अलग करेंगे। यह विश्लेषण भविष्य में उसी गलती को दोहराने से बचाता है।
  3. भावनाओं को संभालना: फेल होने के बाद दुखी होना बहुत स्वाभाविक है इसलिए भावनाओं को दबाएँ नहीं। दबी हुई भावनाएं कभी तो बाहर आयेंगी। इसलिए उसी समय रो ले, अपना दर्द निकाल ले और फिर आगे बढ़ने की सोचें। भावनाओं को संभालना मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।
  4. छोटे लक्ष्य बनाना: जब आत्मविश्वास कि कमी हो, तब एक बार फिर बड़े लक्ष्य के लिए छोटे-छोटे हिस्सों में बाँट ले। जैसे-जैसे छोटे लक्ष्य हासिल होते रहेंगे वैसे-वैसे आत्मविश्वास भी वापिस आने लगेगा। जब यह लगातार करते रहते है हम बड़े लक्ष्य को भी पा सकते है।
  5. सहायता लेना: हर काम आप अकेले नहीं कर सकते और अकेले फेलियर से निकलना बहुत मुश्किल होता है। जब भी ऐसी स्तिथि आये अपने परिवार और दोस्तों से बात करना अच्छा रहता है। किसी की सलाह ले और हो सके तो प्रोफेशनल से सहायता ले। अकेले डूबने से अच्छा है किसी की सहायता ली जाये।
  6. एक्शन प्लान बनाना: अपने खुद के लिए एक एक्शन प्लान बनाना एक कारगर रणनीति है। अपना समय तय करे और रोजाना के काम की लिस्ट बनाये और उसको ट्रैक भी करते रहे। जितनी स्पष्ट योजना होगी उतनी ज्यादा सफलता के चांस होंगे।
  7. शुरुआत करना: अपने ऊपर के सब स्टेप्स को फॉलो किया और शुरुआत नहीं की तो आप ही बताओ क्या फायदा हुआ? जब तक उठकर चलना शुरू नहीं करेंगे, तब तक मंजिल तक नहीं पंहुचा जा सकता। शुरुआत कल से नहीं ,आज और अभी से करें।

फेलियर से सफलता तक का रोडमैप – स्वीकार करो, विश्लेषण करो, एक्शन लो

फेलियर के बाद माइंडसेट कैसे बदलें?

फेलियर के बाद सबसे जरूरी है माइंडसेट में बदलाव लाना। जिसके लिए कुछ स्टेप्स है जो करने चाहिए:

  1. अपनी भाषा बदलें: आप अपने बारे मे क्या सोचते हो यह समझना बहुत जरूरी है। जब भी कोई काम बिगड़ जाये तब "मैं फेल हुआ" की जगह "मैंने कोशिश की" बोले। यह छोटा सा बदलाव आपकी सोच में बड़ा परिवर्तन ला सकता है।
  2. नजरिया बदलें: जब आप किसी चीज़ को देखने का नजरिया बदलते हो, नतीजे भी बदलने लगते है। अपने आप से पूछे: "5 साल बाद यह फेलियर कितना मायने रखेगा?" जब हम समस्या को देखने का नजरिया बदलते है तब वर्तमान की समस्याएँ छोटी नजर आने लगती हैं।
  3. अपनी उपलब्धियों को याद करें: जब भी जीवन मे फेलियर आता है उस समय हम सब कुछ भूल जाते है। अपनी सारी सफलताएं और सारी उपलब्धियां। फेलियर के समय अपनी इन सफलताओ को याद करो और खुद से बोलो ये मैंने पहले भी किया है और अब दुबारा भी करूँगा।
  4. सेल्फ-टॉक बदलें: सफलता के लिए खुद से बात तो करनी पड़ेगी। बिना खुद से बात करें आगे नहीं बढ़ा जा सकता। "मैं नाकाबिल हूँ" की जगह "मैं अभी सीख रहा हूँ" कहें। "मैं हार गया" की जगह "मैंने एक रास्ता और खोज लिया" कहें। यह सकारात्मक self-talk आपके आत्मविश्वास को वापस लाने में मदद करेगा।

नकारात्मक सोच से सकारात्मक सोच की ओर – दिमाग का ट्रांसफॉर्मेशन

समाज के डर से कैसे निपटें?

हम एक समाज मे रहते है और उनका हमारे जीवन पर बहुत असर पड़ता है। इसलिए जब भी इंसान फेल होता है, लोग उसके बारे मे क्या बोलते है उससे उसको डर लगने लगता है

  1. लोगों की राय को महत्व कम दें: जब भी काम बिगड़ता है, कुछ लोग साथ देने और कुछ मज़ाक बनाने आते है। सब लोग बैठकर राय देते है कि ये नहीं किया इस वजह से विफलता मिली। परन्तु यह खुद सोचना है की कौन आपके बारे मे नकारात्मक बातें कर रहे है। ये वही लोग है जो आपकी सफलता से डरते है या खुद कुछ नहीं कर पा रहे।
  2. अपनी कहानी खुद लिखें: क्या आप चाहते हो कि आपकी लाइफ कि कहानी कोई और लिखे? वो अपनी मर्जी से जो चाहे लिख सकता है, जो आपको चाहिए भी नहीं। दूसरों को अपनी कहानी लिखने की इजाजत न दें। आप अपने जीवन के बारे मे दूसरों से ज्यादा आप जानते हो, अपनी क्षमताओं को समझते हो। दूसरों की राय आपकी सच्चाई नहीं बदल सकती।
  3. एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम बनाएँ: अपने आस-पास ऐसे लोग रखे या उन लोगो के साथ रहे जो आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हो। जरूरत पड़ने पर सहारा दे और सच्ची सलाह दे। सकारात्मक लोगों का साथ आपको तेजी से आगे बढ़ने में मदद करेगा।

नकारात्मक बातें फीकी पड़ती हुईं, सकारात्मक लोग साथ – समाज के डर से मुक्ति

फेलियर के बाद सफल होने वालों की कहानियाँ

इतिहास ऐसे अनगिनत उदाहरणों से भरा पड़ा है जिन्होंने फेलियर के बाद दोबारा शुरुआत करके अद्भुत सफलता हासिल की। एपीजे अब्दुल कलाम का उदाहरण लें जिन्हें इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला नहीं मिला, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आज हर बच्चा उन्हें मिसाइल मैन के रूप में जानता है।
माइकल जॉर्डन हाई स्कूल बास्केटबॉल टीम से कट गए, लेकिन आज बास्केटबॉल के भगवान माने जाते हैं। जे. के. रोलिंग को हैरी पॉटर को 12 प्रकाशकों ने रिजेक्ट किया, लेकिन आज वह दुनिया भर में मशहूर हैं। ये कहानियाँ हमें सिखाती हैं कि फेलियर अंत नहीं है, बल्कि सफलता की नींव है।
कलाम, जॉर्डन, रोलिंग – फेलियर से उठकर इतिहास रचने वाले तीन नायक

फेलियर के बारे में 5 मिथक और उनकी सच्चाई

मिथक 1: फेल होना मतलब कमजोर होना
सच: सच्चाई यह है कि जिंदगी मे फेल होना मतलब कोशिश करना है। जो कोशिश नहीं करते, वे कभी फेल भी नहीं होते।
मिथक 2: सफल लोग कभी फेल नहीं होते
सच: सच्चाई यह है कि सफल लोग औरों से ज्यादा फेल होते हैं, बस वे हार नहीं मानते और हर बार नई सीख के साथ आगे बढ़ते हैं।
मिथक 3: एक बार फेल होने पर दोबारा मौका नहीं मिलता
सच: सच्चाई यह है कि जिंदगी में बहुत सारे मौके मिलते है, बस हमें उनको पहचाना है और सही तरीके से इस्तेमाल करना सीखना है।
मिथक 4: फेलियर हमेशा हमारी गलती होती है
सच: सच्चाई यह है कि जिंदगी कई बार परिस्थितियाँ, समय और किस्मत की वजह से फेलियर होता है। हर फेलियर हमारी गलती नहीं होती।
मिथक 5: फेल होने पर लोग हमें कम आंकते हैं
सच: सच्चाई यह है कि जिंदगी मे जो लोग फेल होने के बाद सफलता प्राप्त करते है, लोग उनकी ज्यादा इज़्ज़त करते है। लोगो को संघर्ष करने वाले लोग ज्यादा पसंद आते है।

मिथक vs सच्चाई – जंजीरें टूटती हुईं, अंधेरे से उजाले की ओर

निष्कर्ष:

फेलियर जिंदगी का एक हिस्सा है, जिंदगी नहीं। जैसे सर्दी के बाद बसंत आता है, वैसे ही हर फेलियर के बाद नई शुरुआत का मौका आता है। याद रखें कि हर महान सफलता की कहानी में एक फेलियर का अध्याय होता है। फेल होना कोई अपराध नहीं है, कोशिश न करना अपराध है। आपकी मूल्यवत्ता आपकी सफलताओं से नहीं, आपके संघर्षों से तय होती है।
आज से ही commitment लें कि आप हार नहीं मानेंगे, दोबारा कोशिश करेंगे और खुद पर विश्वास रखेंगे। फेलियर आपको रोकने के लिए नहीं, बल्कि आपको मजबूत बनाने के लिए है।
राख से उठता फीनिक्स – 'फेलियर अंत नहीं, नई शुरुआत है'


क्या आपने कभी फेलियर का सामना किया है? आपने कैसे handle किया? अपने experiences कमेंट में जरूर शेयर करें। हो सकता है आपकी कहानी किसी की help कर जाए। आपके विचार और अनुभव अन्य पाठकों के लिए मार्गदर्शन का काम कर सकते हैं।यह ब्लॉग उन सभी लोगों के लिए है जो आज किसी फेलियर से गुजर रहे हैं। शेयर जरूर करें, ताकि यह message ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँच सके।
यह भी पढ़े:why worries
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