विश्व धर्मों की दृष्टि में दान का महत्व
सभी पाठको की मेरा सदर नमस्कार।
सबसे
पहले आप सबके
प्यार और सरहाना
के लिए
दिल से शुक्रिया।
आज की
जो चर्चा
का विषय
है, वो
बहुत ही दिलचस्प
है "दान"। हम
सब सुनते
आये है की
अगर इस दुनिया
मे दान
करेंगे तब उसका
फल हमे
स्वर्ग मे जरूर
मिलेगा। बहुत सारे लोग मानते भी है
की दान
करने से उनके
जीवन मे बहुत
बदलाव आये है। वो
लोग जो बहुत
परेशान रहा करते थे, वो
लोग अब खुशहाल
जीवन जीते है।
इस
ब्लॉग मे हम
आज संसार
मे अलग-अलग धर्मो के दानों
के बारे
मे और
उनमे किस धर्म मे किस
दान को बड़ा
माना गया है, उसकी
चर्चा करेंगे। "दान" समाज मे एकता
और समरसता
के लिए
बहुत जरूरी है। क्यूंकि दूसरो की सहायता
लेने और दूसरो
की सहयता
करने से ही
संसार चलता आया है और
चलता रहेगा।
हिंदू
धर्म मे दान
को "पंचमहादान"
कहा जाता है, जिसका
अर्थ है सबसे
"पुण्यकारी"। हिंदू
धर्म पांच मुख्य दान है "गोदान",
"भूदान",
"विद्या
दान",
"तुला
दान", और "अन्न
दान"। इन
सब के
अलावा
""अभय
दान"
और
"कन्यादान" को
भी
बड़ा
दान
माना
गया
है।
इन
सबके
बारे
हम
आगे
विस्तार
से
बात
करेंगे।
बौद्ध धर्म मे दान को "दान पारमिता"
कहा
जाता
है,
जिसका
अर्थ
है
दया
और
प्यार
से
देना।
बौद्ध
धर्म
मे
तीन
मुख्य
दान
है
"धम्म
दान",
"आहार
दान",
और
"अभय
दान"
को
सबसे
बड़े
दान
माना
गया
है।
इन
सब
के
अलावा
"विपस्सना
दान"
को
भी
बड़ा
माना
गया
है।
इन
सबके
बारे
हम
आगे
विस्तार
से
बात
करेंगे।
जैन
धर्म
मे
"दान"
को
मोक्ष
का
मार्ग
माना
गया
है।
जैन
धर्म
मे
चार
मुख्य
दान
है
"अहिंसा
दान",
"आहार
दान",
"आवास
दान",
और
"शास्त्र
दान"
को
सबसे
बड़े
दान
माना
गया
है।
इन
सब
के
अलावा
"औषध
दान"
को
भी
बड़ा
माना
गया
है।
इन
सबके
बारे
हम
आगे
विस्तार
से
बात
करेंगे।
सिख
धर्म
मे
"दान"
को
"वंड
छक्को"
कहा
जाता
है,
जिसका
अर्थ
है
सबके
साथ
साझा
करो।
सिख
धर्म
मे
तीन
मुख्य
दान
है
"लंगर
सेवा",
"दसवंध",
और
"कर-परसाद दान"। इन
सब
के
अलावा
"ज्ञान
दान"
को
भी
बड़ा
माना
गया
है।
इन
सबके
बारे
हम
आगे
विस्तार
से
बात
करेंगे।
इस्लाम
धर्म
में
भी
दान
का
को
बहुत
जरूरी
माना
गया
है।
इस्लाम
धर्म
मे
दो
मुख्य
दान
है
" ज़कात",
और
"सदका"। इन
सब
के
अलावा
"सदका-ए-जारिया"
और
"फ़ितरा"
को
भी
बड़ा
दान
माना
गया
है।
इन
सबके
बारे
हम
आगे
विस्तार
से
बात
करेंगे।
ईसाई
धर्म
में
"दान"
को
"भगवान
की
सेवा"
माना
जाता
है।
ईसाई
धर्म
मे
तीन
मुख्य
दान
है
"टाइथ
(दशमांश)",
"गरीबों
और
बीमारों
की
सेवा",
और
"क्षमा
दान"। इन
सब
के
अलावा
"अनजोन
दान"
को
भी
बड़ा
दान
माना
गया
है।
इन
सबके
बारे
हम
आगे
विस्तार
से
बात
करेंगे।
यहूदी
धर्म
में
"दान"
को
"त्ज़ेदकाह"
कहा
जाता
है
जिसका
अर्थ
है
न्यायपूर्ण
दान।
यहूदी
धर्म
में
तीन
मुख्य
दान
है
"आय
का
10-20% दान", "गरीबों, विधवाओं और अनाथों
की
मदद",
और
धार्मिक
शिक्षा
का
प्रसार।
इन
सब
के
अलावा
"गुप्त
दान"
को
भी
बड़ा
दान
माना
गया
है।
इन
सबके
बारे
हम
आगे
विस्तार
से
बात
करेंगे।
हिंदू
धर्म,
को
दुनिया
के
सबसे
पुराने
धर्मो
मे
से
एक
माना
गया
है।
हिंदू
धर्म
को
“सनातन
धर्म”
भी
कहा
जाता
है।
ऐसा
माना
जाता
है
कि
इसका
इतिहास
दस
हज़ार
साल
से
भी
अधिक
पुराना
है।
हिंदू
धर्म
तीन
देशों
मे
अधिक
फैला
हुआ
है,
भारत,
नेपाल
और
मॉरीशस।
हिंदू
धर्म
मे
दान
दैनिक
जीवन
का
एक
मह्त्वपूर्ण
हिस्सा
है।
जैसे
की
पहले
बताया
की
भारत
मे
दान
को
"पंचमहादान"
कहा
जाता
है।
आइये
अब
इसको
विस्तार
से
जानते
है
1.
गौदान : हिंदू धर्म
के
अनुसार
गाय
को
माता
भी
माना
जाता
है,
जिसमे
सभी
देवताओं
का
वास
होता
है। इसलिए
गोमाता
के
दान
को
एक
पुण्यकारी
कार्य
भी
माना
गया
है।
लिखित
शास्त्रों
के
अनुसार
जो
इंसान
गौदान
करता
है,
वह
जीवन
मे
सुख,
शांति
और
धन
कि
प्राप्ति
करता
है।
ऐसा
भी
माना
जाता
है
कि
गौदान
से
इस
जन्म
के
ही
नहीं
बल्कि
आने
वाले
जन्मों
भी
लाभ
होता
है।
2.
भूदान : हिंदू
धर्म
के
अनुसार
"भूदान"
एक
बड़ा
दान
है
, जिसका
अर्थ
है
"भूमि
का
दान"। यह
एक
ऐसा
काम
है,
जिसमे
समाज
मे
एकता
और
समानता
बढ़ाई
जा
सकती
है।
जो
किसान
भूमिहीन
है,
उसको
अपनी
जमीन
का
एक
छोटा
हिस्सा
दान
मे
देने
से
उसके
जीवन
मे
सुधार
किया
जा
सकता
है।
इससे
अमीरो
और
गरीबो
के
बीच
की
खाई
को
कम
किया
जा
सकता
है
"भूदान" के लिए
विनोबा
भावे
जी
ने
१९५१
मे
भूदान
आंदोलन
भी
शुरू
किया
था।
जिसका
मकसद
भूमि
का
दान
करना
था
अपनी
मर्जी
से,
ताकि
ग्रामीण
समुदायों
को
और
मजबूत
बनाया
जाया
जा
सके
और
लोगो
को
आत्मनिर्भर
बनाया
जाया
जा
सके।
ऐसा
माना
जाता
है
"भूदान"
करने
से
आध्यात्मिक
लाभ
भी
मिलते
है।
3.
विद्या दान : हिंदू
धर्म
मे
"विद्या
दान"
एक
बड़ा
और
मह्त्वपूर्ण
दान
है।
"विद्या"
से
ज्ञान
मिलता
है,
जो
अज्ञानता
के
अँधेरे
को
दूर
करता
है
और
सही
रास्ता
खोजने
मे
साहयता
करता
है।
विद्या
दान
से
एक
व्यक्ति
नहीं,
बल्कि
पुरे
समाज
का
कल्याण
होता
है।
जो
भी
व्यक्ति
विद्या
का
दान
देता
है,
उस
पर
मां
सरस्वती
का
आशीर्वाद
बना
रहता
है।
ऐसे
व्यक्ति
को
पुण्य
की
प्राप्ति
के
साथ-साथ उसका
आध्यात्मिक
ज्ञान
भी
बढ़ता
है।
4.
तुला दान : हिंदू
धर्म
में
"तुला
दान"
को
शुभ
और
पुण्यकारी
दान
माना
गया
है।
"तुला
दान"
एक
पुराणी
प्रथा
है,
जिसके
अनुसार
व्यक्ति
अपने
वजन
के
बराबर
का
दान
करता
है
जैसे
अनाज,
कपडे,
पैसे
आदि।
ऐसा
माना
जाता
है
की
"तुला
दान"
करने
वाले
व्यक्ति
के
पापो
का
नाश
होता
है,
घर
मे
सुख-समृद्धि आती है
,उसके
ग्रहो
को
शांति
मिलती
है।
ऐसा
भी
माना
जाता
है
की
उस
व्यक्ति
को
विष्णु
लोक
की
प्राप्ति
होती
है।
5.
अन्न दान : हिंदू
धर्म
में
"अन्न
दान"
को
महत्वपूर्ण
दान
माना
गया
है।
अगर
शास्त्रों
की
माने
"भूखे
को
खाना
खिलाने
से
बढ़कर
कोई
दान
नहीं"। अन्नदान
का
महत्व
धार्मिक
अवसरों
पर
और
भी
बढ़
जाता
है,
इसलिए
धार्मिक
अवसरों,
श्राद्ध,
और
अमावस्या
और
पूर्णिमा
के
दिन
लोग
खुलकर
अन्न
दान करते
है।
ऐसा भी
माना
जाता
है
कि
ऐसा
करने
से
पुण्य
कि
प्राप्ति
होती
है,
सामाजिक
भावना
का
विस्तार
होता
है,
पितृ
दोष
और
ग्रह
दोषों
से
भी
मुक्ति
मिलती
है।
जीवन
मे
सकारात्मक
ऊर्जा
का
प्रवाह
बढ़ता
है।
बहुत
सारे
लोग
समय-समय पर
अन्नदान
करते
रहते
है।
6.
अभय दान : हिंदू
धर्म
में
"अभय
दान"
का
बहुत
मत्वपूर्ण
दान
है।
जिसका
अर्थ
है,
किस
को
उसको
डर
से
मुक्ति
दिलाना
और
उसे
सुरक्षा
प्रदान
करना।
"अभय
दान"
एक
इंसानियत
भरा
गुण
है,
जो
लोगो
के
प्रति
करुणा,
सहानुभूति
और
निस्वार्थता
को
दर्शाता
है।
इस
दान
को
ऐसे
भी
देखा
जा
सकता
है
जैसे
किसी
कि
जान
बचाना,
किसी
बेघर
को
घर
मे
रहने
कि
जगह
देना,
किसी
कि
बात
सुनना
ताकि
उनको
मानसिक
शांति
मिल
सके,
और
किसी
को
न्याय
दिलाने
मे
सहयता
करना।
7.
कन्यादान : हिंदू
धर्म
में
"कन्यादान"
को
"महादान"
माना
जाता
है।
यह
दान
एक
रस्म
पर
किया
जाता
है,
जिसे
विवाह
कहते
है।
यह
एक
ऐसी
प्रथा
है
जो
बहुत
पुराने
समय
से
चली
आ
रही
है,
जिसमे
एक
पिता
अपनी
बेटी
की
जिम्मेदारी
एक
वर
को
सौंपता
है।
यह
बेटी
के
लिए
नए
जीवन
की
नयी
शुरुआत
माना
जाता
है।
ऐसा
कहा
जाता
है
ऐसा
करने
पर
माता-पिता को
सौभाग्य
और
खुशहाली
की
प्राप्ति
होती
है।
विदाई
का
समय
माता-पिता और
परिवार
के
लिए
बहुत
ही
भावनात्मक
क्षण
होता
है।
बौद्ध
धर्म
भी
हिंदू
धर्म
की
तरह
एक
भारतीय
धर्म
है।
बौद्ध
धर्म
को
जिसे
"बुद्ध
धर्म"
के
नाम
से
भी
जाना
जाता
है,
इस
धर्म
की
शुरुआत
भारत
मे
गौतम
बुद्ध
ने
२६००
साल
पहले
की
थी।
यह
धर्म
गौतम
बुद्ध
की
शिक्षाओ
और
उनके
जीवन
के
अनुभवों
पर
आधारित
है।
बौद्ध
धर्म
दुनिया
के
कई
देशों
मे
एक
प्रमुख
धर्म
है
जैसे
चीन,
कोरिया,
जापान,
श्रीलंका,
और
भारत।
बौद्ध
धर्म
मे
भी
दान
को
एक
विशेष
स्थान
दिया
गया
है।
बौद्ध
धर्म
मे
दान
को
"दान
पारमिता"
कहा
जाता
है।
आइये
अब
इसको
विस्तार
से
जानते
है
1. धम्म दान : बौद्ध धर्म
में
"धम्म
दान"
को
सबसे
बड़ा
दान
माना
गया
है।
जिसका
अर्थ
है
बुद्ध
के
द्वारा
दी
गयी
शिक्षाओं
का
दान
करना,
दूसरे
लोगो
को ज्ञान
देना
ताकि
वो
दुःख
से
मुक्ति
पा
सके।
इस
दान
को
देने
से
दूसरों
के
साथ
खुद
का
भी
फायदा
होता
है,
क्योंकि
इससे
आध्यात्मिक
विकास,
कर्मों
में
सुधार,
सद्गुणों
का
विकास,
कर्मों
का
शुद्धिकरण
और
दुखो
के
मुक्ति
का
रास्ता
आसान
होता
है।
बौद्ध
धर्म
मे
"आहार
दान",और "अभय दान"
हिंदू
धर्म
के
"अन्न
दान"
और
"अभय
दान"
जैसा
ही
प्रतीत
होता
है। ये
दोनों दान
समाज
के
विकास
के
लिए
बहुत
जरूरी
है।
जब
सब
लोग
और
सब
धर्मो
के
लोग
मिलकर
दान
करेंगे
तब
सब
लोगो
के
जीवन
के
स्तर
मे
सुधार
होगा।
जैन
धर्म
भी
हिंदू
और
बौद्ध
धर्म
की
तरह
एक
भारतीय
धर्म
है।
जिसकी
शुरुवात
लगभग
छठी
शताब्दी
ईसा
पूर्व
में
मानी
जाती
है।
जैन
धर्म
मुख्य
रूप
से
भारत
में
पाया
जाता
है,
इसके
अल्वा
दुनिया
के
कई
और
देशों
मे
भी
फैला
हुआ
है
जैसे
की
अमेरिका,
ब्रिटेन,
कनाडा,
केन्या,
फिजी,
ऑस्ट्रेलिया,
और
दक्षिण
अफ्रीका।
जैन
धर्म
मे
दान
को
आत्मा
की
शुद्धि
और
मोक्ष
की
प्राप्ति
के
लिए
जरूरी
बताया
है।
आइये
अब
इसको
विस्तार
से
जानते
है
1. अहिंसा दान : जैन धर्म
मे
"अहिंसा
दान"
एक
सिद्धांत
है,
जिसका
अर्थ
है
किसी
भी
जीवित
प्राणी
को
किसी
भी
प्रकार
की
हिंसा
से
बचाना।
अहिंसा
से
बचना
केवल
शारीरिक
तौर
पर
नहीं,
बल्कि
मानसिक
तौर
पर
भी।
यह
दान
न
केवल
मानव
जाति
के
लिए,
बल्कि
सभी
जीवित
प्राणियों
के
लिए
भी
है।
अहिंसा
के
तीन
रूप
बताये
गए
है
, मन
से
(किसी
के
प्रति
बुरी
सोच
ना
रखना),
वाणी
से
(किसी
के
लिए
गलत
शब्दों
का
प्रयोग
ना
करना)
और
तीसरा
कर्म
से
(किसी
को
अपने
कर्म
से
नुकसान
ना
पहुंचाना। अहिंसा
दान
को
जैन
धर्म
मे
'अभयदान'
भी
कहा
गया
है।
2. आवास दान : जैन धर्म
में
"आवास
दान"
को
एक
महत्वपूर्ण
पुण्य
का
दान
माना
गया
है,
जिसका
अर्थ
है
किसी
को
रहने
के
लिए
जगह
देना।
उनका
मानना
है
की
ये
लोगो
की
बुनियादी
जरूरतों
को
पूरा
करने
मे
मदद
करता
है,
जिससे
वो
सुख
और
शांति
से
रह
सकते
है।
ऐसा
करने
वाले
व्यक्ति
के
भीतर
लोभ
खत्म
हो
जाता
है,
उसके
दिल
मे
दूसरों
के
लिए
समानता
का
भाव
भी
उत्पन
होता
है।
जैन धर्म मे "आहार दान", और "शास्त्र दान", हिंदू धर्म के "अन्न दान" और "विद्या दान" और बौद्ध धर्म के "आहार दान" और "धम्म दान" जैसा ही प्रतीत होता है। सभी धर्म मिल कर मानवता के लिए काम कर रहे है, और सभी धर्म संसार को सबके रहने के लिए बनाना चाहते है। सब धर्म चाहते है कोई भी भूखा ना सोये, और सबको ज्ञान की प्राप्ति हो।
सिख
धर्म
भी
हिंदू,
बौद्ध,
और
जैन
धर्म
की
तरह
एक
भारतीय
धर्म
है।
जिसकी
शुरुआत
१५
वी
शताब्दी
के
अंत
मे
पंजाब
मे
हुई
थी।
सिख
धर्म
के
लोग
एक
ही
ईश्वर
मे
विश्वास
रखते
है।
सिख
धर्म
के
लोगो
की
सबसे
बड़ी
आबादी
भारत
मे
ही
है,
परन्तु
यह
दुनिया
के
दूसरे
देशों
मे
भी
फैला
हुआ
है
जैसे
अमेरिका,
कनाडा,
यूनाइटेड
किंगडम,
ऑस्ट्रेलिया,
मलेशिया
और
अफ्रीका
के
कई
देश।
सिख
धर्म
मे
दान
का
बहुत
महत्व
है,
दान
करना
सिखो
के
लिए
एक
धार्मिक
कर्तव्य
है।
सिख
धर्म
मे
"दान"
को
"वंड
छक्को"
कहा
जाता
है,
जिसका
अर्थ
है
सबके
साथ
साझा
करो।
आइये
अब
इसको
विस्तार
से
जानते
है
1. दसवंध : सिख धर्म
मे
"दसवंध"
दान
का
एक
मह्त्वपूर्ण
अंग
है,
जिसका
अर्थ
है
अपनी
कमाई
का
दसवां
हिस्सा
दान
करना।
"दसवंध"
की
प्रथा
को
सिखो
के
पहले
गुरु
श्री
नानक
देव
जी
द्वारा
शुरू
की
गई
थी।
यह
दान
गरीब
और
जरूरतमंद
लोगो
की
मदद
के
लिए
किया
जाता
है। ऐसा
करे
से
समाज
मे
एकता
और
समानता
का
भाव
आता
है।
सिख
धर्म
का
"लंगर
दान"
और
"ज्ञान
दान",
हिंदू
धर्म
के
"अन्न
दान"
और
"विद्या
दान",
बौद्ध
धर्म
के
"आहार
दान"
और
"धम्म
दान",
और
जैन
धर्म
मे
"आहार
दान",
और
"शास्त्र
दान"
जैसा
ही
प्रतीत
होता
है।
सभी
धर्म
समाज
की
भलाई
के
लिए
ही
काम
कर
रहे
है।
सभी
धर्म
के
लोग
चाहते
है
की
दुनिया
मे
कोई
भी
इंसान
भूखा
ना
रहे,
सबको
शिक्षा
मिले।
कोई
भी
धर्म
दूसरे
धर्म
से
अलग
नहीं
है।
इस्लाम
धर्म
की
शुरुआत
७
वी
सदी
मे
हुई
थी।
दुनिया
मे
५७
ऐसे
देश
है,
जिन्हे
इस्लामिक
देश
माना
जाता
है,
और
इनमे
से
२७
देशों
ने
खुद
का
राष्ट्रीय
धर्म
घोषित
इस्लाम
को
घोषित
कर
दिया
है।
यह
धर्म
मध्य
पूर्व,
उत्तरी
अफ्रीका,
सहेल
और
मध्य
एशिया
में
प्रमुख
है,और दक्षिण
और
दक्षिण
पूर्व
एशिया,
पश्चिम
और
पूर्वी
अफ्रीका
में
भी
व्यापक
रूप
से
फैला
हुआ
है।
इस्लाम
धर्म
मे
दान
को
विशेष
स्थान
दिया
हुआ
है।
दान
देना
मुस्लिम
के
लिए
अनिवार्य
है,
जिनके
पास
एक
सीमा
से
अधिक
की
संपत्ति
है।
आइये
अब
इसको
विस्तार
से
जानते
है
1. सदका : इस्लाम धर्म मे
"सदका"
दान
का
हिस्सा
है,
जिसका
अर्थ
है
अपनी
मर्जी
से
दान
देना।
यह
आत्मा
और
धन
की
शुद्धि
का
एक
काम
है,
जो
समाज
मे
दया
और
करुणा
को
चिन्हित
करता
है।
मुस्लिम
लोग
मानते
है
की
सदका
देने
से
उनकी
समस्यांए
दूर
होगी,
अल्लाह
से
पुरुस्कार
मिलेगा,
आध्यात्मिक
शुद्धि
मिलेगी,
और
जरूरतमंद
लोगो
की
मदद
होगी।
2. जकात : इस्लाम धर्म मे
"जकात"
भी
"सदका"
की
तरह
एक
दान
है,
जिसका
अर्थ
है,
अनिवार्य
दान। यह
समाज
मे
धन
के
वितरण
को
सुनिश्चित
करता
है
और
असमानता
को
कम
करता
है।
यह
माना
जाता
है
"जकात"
देने
से
समाज
मे
गरीबी
की
असमानता
को
कम
किया
जा
सकता
है।
"जकात"
अल्लाह
की
आज्ञा
है,
जिसे
हर
मुस्लिम
को
पूरा
करना
अनिवार्य
है।
3. सदका-ए-जारिया : इस्लाम मे "सदका-ए-जारिया" एक ऐसा
दान
है,
मृत्यु
के
बाद
भी
जो
पुण्य
का
स्रोत
बना
रहता
है।
यह
एक
सामजिक
कल्याण
का
काम
है,
जिसमे
जरूरतमंद
लोगो
की
मदद
की
जा
सकती
है।
"सदका-ए-जारिया"
को
अगर कुछ
उदहारण
से
देखा
जाए
जैसे
पानी
का
कुआं
खुदवाना,
वृक्षारोपण
करना,
स्कूल
खुलवाना
आदि।
ऐसा
माना
जाता
है
यह
दान
अल्लाह
को
खुश
करने
का
एक
बेहतरीन
तरीका
है।
4. फ़ितरा : इस्लाम धर्म मे
"फ़ितरा"
एक
अनिवार्य
दान
है,
जो
की
ईद
की
नमाज
से
पहले
देना
होता
है।
यह
दान
रमजान
के
महीने
मे
दिया
जाता
है
ताकि,
वे
ईद
के
समय
लोगो
मे
खुशियाँ
बाँट
सके।
ऐसा
माना
जाता
है
"फ़ितरा"
देने
से
गलतियां
माफ़
होंगी,
एकजुटता
बढ़ेगी,
जरुरतमंदो
की
मदद
होगी,
लोगो
के
बीच
समानता
आएगी।
ईसाई
धर्म
की
शुरुआत
पहली
शताब्दी
ईस्वी
मे
हुई
थी।
यह
धर्म
यीशु
मसीह
के
जीवन,
शिक्षाओं,
मृत्यु
और
पुनरुत्थान
पर
आधारित
है।
ईसाई
धर्म
दुनिया
का
ऐसा
धर्म
है
जी
157 देशों
मे
माना
जाता
है।
1. ईसाई
धर्म
का
"दशमांश"
सिख
धर्म
के
"दसवंध"
एक
जैसे
ही
प्रतीत
होते
है।
दोनों
मे
ही
अपनी
कमाई
का
दसवां
हिस्सा
दान
करना
होता
है।
ऐसा
माना
जाता
है
की
दान
करने
से
दूसरों
के
प्रति
प्रेम,
करुणा
और
सहानुभूति
उत्पन
होती
है।
ईसाई
धर्म
में,
दान
केवल
वित्तीय
दान
तक
ही
सीमित
नहीं
है,
बल्कि
इसमें
समय,
कौशल,
और
संसाधनों
को
दूसरों
के
साथ
साझा
करना
भी
शामिल
है।
यहूदी
धर्म
को
"यूदायवाद"
भी
कहा
जाता
है।
यह दुनिया
के
पुराने
धर्मो
मे
से
एक
है,
जो
४०००
साल
पुराना
है।
यहूदी
धर्म
मुख्य
रूप
से
इज़राइल
मे
है,
इसके
अलावा
यह
संयुक्त
राज्य
अमेरिका,
फ्रांस,
कनाडा,
अर्जेंटीना,
यूनाइटेड
किंगडम
और
रूस
सहित
कई
अन्य
देशों
में
भी
फैला
हुआ
है।
यहूदी
धर्म
में
"दान"
को
एक
धार्मिक
कर्तव्य
माना
जाता
है।
यहूदी
धर्म
में
"दान"
को
"त्ज़ेदकाह"
कहा
जाता
है।
आइये
अब
इसको
विस्तार
से
जानते
है
यहूदी
धर्म
मे
त्ज़ेदकाह
का
अर्थ
है
एक
व्यक्ति
की
अपने
समुदाय
या
समाज
के
प्रति
अपनी
जिमेदारी।
यहूदियों
के
लिए
दूसरों
की
मदद
करना,
खासकर
जरूरतमंदों
की,
एक
अनिवार्य
कार्य
है।
यहूदियों
धन
के
अलावा
समय
का
दान,
और
अंग
दान
भी
किया
जाता
है।
सभी
धर्मो
मे
दान
की
परंपरा
को
देखने
के
बाद
ऐसा
लगता
है
की
सभी
एक
जैसे
ही
है।
सभी
धर्म
समाज
मे
सुधार
की
बात
करते
है,
कोई
भूखा
ना
सोये,
सबको
शिक्षा
मिले,
सभी
मिलजुल कर
समाज
को
आगे
बढ़ाए
जिससे
देश
आगे
बढ़ेगा।
सभी
को
अपनी
हैसियत
के
हिसाब
से
दान
करना
चाहिए। आपका
एक
छोटा
सा
दान
भी
किसी
की
ज़िन्दगी
मे
बहुत
बड़ा
बदलाव
ला
सकता
है।
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