Are you stuck in life? These 6 signs will tell you the truth!
सभी पाठको को दिल से नमस्कार
आप सब के प्यार और सरहाना के लिए दिल से शुक्रिया।
दुबारा मिलना हर बार एक सुखद एहसास देता है, आज हम दुबारा से मिल रहे है एक नए विषय
के साथ। असल मे यह कोई विषय नहीं एक सवाल है, जो हम हररोज खुद से पूछते है कि
"क्या मैं ज़िन्दगी मे ठहर गया हूँ"?
अगर आप भी इस सवाल का जवाब चाहते है, तो इस ब्लॉग
मे बताये गए बिन्दुओ को ध्यानपूर्वक पढ़े। इन बिन्दुओ को पढ़कर आपको वजह पता लग सकती
है। जब तक आपको वजह नहीं पता आप उसमे सुधार भी नहीं कर पाओगे।
जिस तरह डॉक्टर तब तक मरीज का इलाज नहीं करता,
जब तक वजह का ना पता लगे। वह टेस्ट करवाता रहता है, जब तक पक्का ना हो बीमारी कि वजह
क्या है और बीमारी पता लगते ही वह एक पल भी खराब नहीं करता और इलाज शुरू कर देता है।
यह ब्लॉग भी आपकी सहयता के लिए है, आप वजह का पता करो और उसपे काम शुरू करो।
को जब तक बीमारी का पता नहीं लगता वह इलाज नहीं
कर पाता। वह तब तक टेस्ट करवाता है, जब तक पक्का न हो जाए कि बीमारी कि असली वजह क्या
है।
हम सब अपनी ज़िंदगी मे आगे बढ़ना चाहते है और वो
हर मुकाम देखना चाहते है जो ख़ुशी से भरा हो । वह पल कुछ भी हो सकते है जैसे एक बड़ी
गाड़ी लेने का, अपना घर लेने का, विदेशो मे घूमने का और भी बहुत सरे पल। और इन सब पलों
के लिए हम जी जान लगाकर सुबह से शाम तक मेहनत करते है। आइये देखते है वो कौनसे ऐसे
लक्षण है, जिससे पता लगेगा कि हम जीवन मे सचमुच मे ठहर गये है? या हम सही रास्ते पर
चल रहे है।
1. रोज़ाना जीवन में उत्साह की कमी: किसी भी काम
को करने के लिए उत्साह की बहुत जरूरत होती है । जिस काम को आधे मन और कम उत्साह से
करते है, उसके नतीजे भी वैसे ही मिलते है। उसके विपरीत जब किस काम को दिल से और पुरे
उत्साह से किया जाये, उसके नतीजे अच्छे ही मिलते है।
जब भी आप सुबह उठते हो क्या एक सवाल आप खुद से
करते हो कि क्या मैं आज के दिन के लिए उत्साहित हूँ"? या नहीं? हररोज एक ही रूटीन
को निभा रहा हूँ ? कुछ भी ज़िन्दगी मे नया नहीं हो रहा। हररोज बस सुबह उठ रहा हूँ, ऑफिस जा रहा हूँ, दिन
भर स्क्रीन के सामने बैठकर काम कर रहा हूँ, और शाम को घर पे आ कर फिर से काम कर रहा
हूँ और बस यही चक्कर चलता ही जा रहा है और जो खत्म होने का नाम नहीं ले रहा।
अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, यह पहला लक्षण
है कि "आप ज़िन्दगी मे ठहर गए हो" इसमें सुधार की जरूरत है, ताकि आपके जीवन
मे उत्साह की वापसी हो और आपके जीवन मे बदलाव
हो।
2. लक्ष्यों का धुंधला होना या गायब होना : जिन
लोगो का ज़िन्दगी मे कोई लक्ष्य नहीं होता, वह सारी उम्र इधर-उधर ही भटकते रहते है।
क्यूंकि जिनकी ज़िन्दगी मे कोई लक्ष्य होता है, वह भटक कर भी दुबारा सही रास्ते पर आ
ही जाते है। आपको पता है समुद्रो मे रात के समय सही दिशा का नहीं पता लग पाता, जिस
वजह से बहुत से जहाज अपना रास्ता भटक जाते है। तब वह समुंदर मे बने एक प्रकाशस्तंभ
(lighthouse) की वजह से सही रास्ता खोज पाते
है।
अगर आपके जीवन मे भी कोई लक्ष्य नहीं है, ना
की कोई लक्ष्य बनाने की इच्छा हो रही है, और जब भी अपने भविष्य के बारे मे सोचते हो
तब डर और खालीपन महसूस होता है।
अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, यह दूसरा लक्षण
है कि "आप ज़िन्दगी मे ठहर गए हो" आपको अपने जीवन मे समय लगाकर एक लक्ष्य
खोजने की जरूरत है, ताकि आप भी सही रास्ते पर वापिस आ सको।
3. खुद को फँसा हुआ महसूस करना : जब भी आप किसी
एक लूप मे फस जाते हो, और वहां से निकलने का रास्ता ही नहीं मिलता। आप जितना मर्जी
घूम लो फिर भी अंत मे खुद को वही खड़ा पाते हो या वही कम करता हुआ पाते है। उसकी एक
बड़ी वजह है की आप अपने दिमाग को समय नहीं देते सोचने का और जब देते हो तब खुद फिर वही
पाते हो।
सारा दिन मोबाइल पर सोशल मीडिया, फिल्मे देखना,
टीवी देखना इन्ही मे निकल जाता है। थोड़ी देर
के लिए होश आती है की बहुत देर से मोबाइल चला रहे हो कुछ पल के लिए खुद को रोकते हो की बहुत समय हो गया
अब कुछ और करते है। परन्तु कुछ काम ना होने की वजह से फिर से खुद को वही करता हुआ पाते
हो।
अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, यह तीसरा लक्षण
है कि "आप ज़िन्दगी मे ठहर गए हो" अब समय आ गया है, खुद को वहां से निकलो
कुछ करने कि सोचो और अपने जीवन मे सुधार करो।
4. बदलाव से डर लगना : जो काम पहले से कर रहे हो, उसका हमेशा पहले वाला
ही नतीजा आएगा। उसको फिर चाहे सारी उम्र कर लो, वह नतीजा नहीं बदलने वाला। पर अगर एक
छोटा से बदलाव भी किया जाए, वह नतीजों को बदल सकता है। सुबह सुबह 7 बजे उठते हो, और ऑफिस लेट पंहुचते हो,
जिसकी वजह से ऑफिस मे डाँट खानी पड़ती है और शर्मिंदा होना पड़ता है। आप इस बात से दुखी
हो चुके हो तो एक दिन 15 मिनट पहले उठकर देख
लो। यह एक छोटा सा बदलाव आपके ऑफिस का माहौल पूरी तरह से बदल देगा।
परन्तु अगर आपको डर लगता है बदलाव करने से, अपने
आराम जोन से बाहर निकलने से। तब आपके जीवन मे कुछ भी सुधार नहीं हो सकता। बदलाव का
काम ना करके आप खुद को पीछे धकेल रहे हो
अगर आपके साथी भी ऐसा हो रहा है, यह चौथा लक्षण
है कि “आप ज़िन्दगी मे ठहर गए हो" अब समय आ गया है, अपने आराम जोन से बाहर आ कर
ज़िन्दगी मे बदलाव करने का। वरना जिस जगह बैठे
हो वही बैठे रह जाओगे और पीछे रह जाओगे।
5. दूसरों की ज़िंदगी देखकर हीनभावना आना : एक बात
साफ़ है, जो ज़िंदगी मे जितनी मेहनत करेगा उतनी ही सफलता पायेगा। बिना मेहनत के सफलता
नहीं मिल सकती, कुछ दिनों के लिए ख़ुशी जरूर मिल सकती है।
एक बात देखो दुसरो ने समय पर फॉर्म भरा, उसकी
तैयारी की, वो सब कुछ किया जिसकी जरूरत थी। और आपको लगा जितना पढ़ा है, उतना ही काफी
है और की जरूरत नहीं। जब नतीजा आया उसका हो गया आपका नहीं हुआ, फिर सामने वाले के बारे
सोचना इसको मिल गया और मुझे नहीं। खुद मे सुधार
करो तभी ज़िंदगी मे बदलाव होगा।
एक बात सोचने वाली है, ज़िंदगी आपकी, खुशियाँ
आपकी, काम करने का तरीका आपका, काम करने का समय आपका और आप दूसरों कि ज़िंदगी देखकर
खुद मे हीनभावना ला रहे हो। खुद के किये हुए काम की जिमेवारी लेनी होगी, जलने से कुछ
नहीं होगा।।
अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, यह लक्षण पांच
है कि “आप ज़िन्दगी मे ठहर गए हो" अब समय आ गया है दूसरों के बारे मे सोचना छोड़कर
अपने काम मे सुधार करना होगा।
6. शारीरिक/मानसिक ऊर्जा का गायब होना : हमारे जीवन
मे ऊर्जा का बहुत महत्व है। हमारा शरीर और दिमाग एक ऊर्जा से ही चल रहे है। जिस दिन
यह ऊर्जा खत्म होगी उसी दिन दिमाग और शरीर भी काम करना बंद कर देगा। जिस तरह बिजली
होने पर ही घर मे लगी बिजली की चीज़ो को इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर बिजली ही नहीं
होगी वो सब चीज़े कोई मायने नहीं रखती, फिर वो कितनी ही महंगी क्यों ना हो।
अगर आपको शारीरिक मेहनत करना भी भरी लगता है,
ऐसा लगता है की शरीर मे ऊर्जा ही नहीं और दिमाग हमेशा थका रहता है। दोस्त यह चिंता
की बात है, वो दो लाइन किसी फिल्म मे बोली है कि ज़िंदा हो तो ज़िंदा नजर आना भी जरूरी
है।
अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, यह छटा लक्षण
है कि “आप ज़िन्दगी मे ठहर गए हो" अब समय
आ गया है, शारीरिक/मानसिक ऊर्जा को दुबारा से सही दिशा मे लगाया जाए और अपने जीवन मे
बदलाव किया जाये।
अगर ऊपर लिखे 6 बिन्दुओ मे से आपके जीवन मे भी
कुछ बिंदु है। आपको डरने और घबराने की जरूरत नहीं है। यह ठहराव स्थाई नहीं है, जैसे
ही आप अपने जीवन मे थोड़ा भी बदलाव करेंगे यह सब दूर होता चला जायेगा। आपको बैठकर खुद
से बात करनी होगी और ज़िन्दगी मे सही रास्ता चुनकर उस पर चलना होगा।
ज़िन्दगी मे ठहराव एक पड़ाव है, कोई असफलता नहीं। आपका जीवन एक नदी की तरह जिसमे कभी पानी रुकता है, कभी दुबारा बहने लगता है। हिम्मत रखनी है और खुद पर भरोसा करना है की अब समय आने वाला है।
True facts Sachin Sir
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