स्पष्ट सोच - सफलता का सबसे आसान फॉर्मूला
"स्पष्ट सोच वह दीपक है जो अंधेरे में रास्ता दिखाता है।" — स्वामी विवेकानंद
सबसे पहले आप लोगो के प्यार और सराहना के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया। आज हम लोग फिर से मिल रहे है, एक नयी चर्चा का लिए। आज का जो विषय है, वो बहुत ही खास है, जो कि है "सोच"। धरती पर सोचने और समझने की क्षमता कुछ खास प्राणियों मे ही है जैसे की इंसान और जानवर।
इंसान और जानवर की सोच की सोच मे बहुत ज्यादा फर्क नहीं है। जानवर भी इंसानो की तरह ही भावनाएं रखते है जैसे कि दुःख-सुख, शोक मनाना और भी बहुत सारी चीज़ो मे समानता है। परन्तु के चीज़ है जो इंसानो की जानवरो से अलग करती है वो है तर्क करना और दिमाग का इस्तेमाल करना।
हमे यह बचपन से ही बताया जाता है कि अच्छा सोचो, और जो सोच रहे हो उसको साफ सोचो। जब हम चीज़ो को दिमाग मे साफ देख पाएंगे तभी हम उसको ज़िन्दगी मे कर भी पाएंगे। अगर हम हर समय उलझे रहेंगे तब हम ज़िन्दगी मे सफलता से दूर होते चले जायेंगे। हमे सीखना होगा कि साफ कैसे सोचे
आज का ब्लॉग इसी बात कि चर्चा के लिए है कि "स्पष्ट कैसे सोचे" ?
अगर आपको पहले ही पता हो कि जो आप पढ़ने जा रहे हो उसके क्या फायदे है, तब फिर आप मन लगाकर पढ़ते हो और पढ़ने मे मज़ा भी आता है। इसलिए स्पष्ट सोचने कि कुछ फायदे शुरुवात मे ही बता देना चाहता हूँ,
1.
स्पष्ट सोचने से जीवन मे निर्णय लेने मे आसानी होती है
2.
स्पष्ट सोचने से जीवन मे तनाव काम होता है
3.
स्पष्ट सोचने से हम अपनी समस्याओं का समाधान तेजी से कर सकते है
4.
स्पष्ट सोचने से हम दूसरों से गहरी बातो पर संवाद कर सकते है
अंत मे 3S का एक फार्मूला भी बताऊंगा, जिसके अभ्यास से आप भी स्पष्ट सोच सकते हो
चलिए अब कुछ तरीके देखते है, जिनको आप अपने जीवन मे अपनाकर स्पष्ट सोच सकते हो और सफलता के लिए राह ढूंढ सकते हो।
1.
अपनी सोच को सही दिशा मे लगाए : जिस तरह अगर हमे पूर्व मे जाना हो, और हम पश्चिम कि तरफ चलते रहेंगे हम अपनी मज़िल तक कभी पंहुच ही नहीं पाएंगे। हमे अपनी समस्या के बारे मे सोचना होगा, तभी हम उसका समाधान कर पाएंगे। किसी भी बड़ी समस्या को आगे हम छोटे-छोटे हिस्सों मे तोड़ लेते है, समाधान करना आसान हो जाता है। दूसरे सिर्फ आपको भटका सकते है, सही दिशा खुद ही ढूंढ़नी पड़ती है।
2.
भावनाओं को नियंत्रित करे : आपने सुना ही होगा कि गुस्से मे कोई फैसला नहीं लेना चाहिए, और प्यार मे कोई भी वादा नहीं करना चाहिए। यह कहने कि वजह है कि आप अपनी भावनाओं को नियंत्रित करे, शांत दिमाग से फैसला ले। जब तक आपकी भावनाएं आपके नियंत्रण मे है, कोई भी आपका नुकसान नहीं कर सकता। लोग नुकसान ही तब कर पाते है, जब आप अपना नियंत्रण खो देते हो।
3.
तार्किक बने : अगर स्पष्ट सोचना है, तार्किक तो बनना पड़ेगा। हर उस पहलू के बारे मे सोचना होगा जो हो सकती है, किसी ने कह दिया उसे ही सत्य नहीं मान लेना है। आपके पास अपना दिमाग है, आप अलग रास्ता चुन सकते हो। भीड़ के पीछे कभी नहीं चलना चाहिए कि सब कह रहे है, तो सही ही होगा। एक जैसी सोच के लोग हमेशा एक साथ ही होते है, फिर वो गलत हो या सही। आपको आपने विवेक और शांत मन से फैसले लेने होंगे, दूसरे वैसा कहते है इस वजह से नहीं।
4.
अपनी धारणाओं को चुनौती दें : बचपन से जवानी तक हम बहुत सारी बाते सुनते है, जिनसे हमारी धारणाएं बन जाती है और समय के साथ वो और पक्की होती जाती है। जैसे कि दूसरे धर्म और दूसरी जात के लोग ऐसा करते है, जो आपसे अलग है तब उन्हें गलत समझ लिया जाता है। अगर अलग सोच रखते है, वो गलत हो जाते है, जैसा हम खाते है वो वैसा नहीं खाते तो वो गलत हो जाते है। इन पुराणी सोच को चुनौती देनी पड़ेगी तभी हम आपने बच्चों को एक अच्छा समाज देकर जायेंगे।
5.
सरल भाषा का प्रयोग करे : आइंस्टीन ने बोला था कि "अगर आप किसी विषय को सरल शब्दों मे बता सकते हो तब वह विषय आपको अच्छे से आता है"। बड़ी से बड़ी समस्या को छोटे-छोटे टुकड़ो मे तोड़कर खुद के लिए आसान बना ले। आधी समस्या तभी सुलझ जाती है जब उसको छोटे टुकड़ो मे बाँट लिया जाता है। समस्या को आसान और सरल शब्दों मे समझें ताकि सुलझाने मे दिक्कत ना हो। एक बात का ध्यान रखे खुद को शब्दों के जाल मे मत फँसा लेना कभी उनसे निकल ही ना पाओ।
6.
एकाग्रता बढ़ाएँ : स्पष्ट सोचने के लिए एकाग्रता की बहुत ज्यादा जरूरत होती है। जब आपकी एकाग्रता अच्छी होती है, आप सब पहलुओं को सोच पाते है। जब हमारा ध्यान एक ही समय पर बहुत सी चीज़ो मे होता है, तब वह भटकने लगता है। इसलिए एक समय पर एक ही चीज़ पर ध्यान देना चाहिए। हर काम को थोड़ा-थोड़ा करने से अच्छा है, कि एक ही काम पर ध्यान लगाकर उसे ही खत्म कर दिया जाये।
7.
निर्णय लेने से पहले सोचें : यह एक तीर के सामान है, एक बार अगर धनुष से निकल गया वापिस नहीं आ सकता। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले पूरा सोच विचार कर लेना चाहिए। आधे- अधूरे मन से कोई भी फैसला नहीं लेना चाहिए। यह सोचना भी जरूरी है की निर्णय मैं खुद से ले रहा हूँ या किसी के दबाव मे। यह निर्णय शांत मन से कर रहा हूँ, या जल्दबाज़ी मे ले रहा हूँ। जो इंसान अपनी ज़िन्दगी के निर्णय खुद लेता है, बाद मे उसे पछतावा नहीं होता। इसलिए हमेशा निर्णय लेने से पहले सोचे।
3S का एक फार्मूल
1.
Stop
(रुकें): किसी भी तरह का निर्णय लेने से पहले 10 सेकंड का विराम अवश्य लें।
2.
Sort
(छाँटें): हमेशा तथ्य को भावना से और भावना को धारणा से अलग रख कर सोचना चाहिए, जिससे स्पष्ट सोचने मे आसानी होती है।
3.
Solve
(हल करें): सबसे सरल और तार्किक समाधान चुनें।
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