मन की शांति: विचारों को समझें, वर्तमान में जिएं

हर एक इंसान के दिमाग मे एक ही समय पर बहुत सारे विचार आते है। विचार आने पर वह विचारो का पीछा करने लगता है, पहले एक फिर दूसरा और फिर तीसरा ऐसे ही एक लम्बी कतार चलती है। इन्ही विचारो का पीछा करते हुए जब शाम को थककर बेड पर लेटता है, तब सोचता है की आज सारा दिन किया क्या है? 

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ये किसी एक की कहानी नहीं हम सबकी है, हम बस विचारो मे ही उलझे रहते है। ये एक बड़ी वजह है, की कई बार हमे जंहा होना चाहिए वहां नहीं होते। क्लास मे बैठे हुए खलेने की सोचते है, खेलते समय क्लास की, नौकरी करते हुए छोड़ने की, और छोड़ने पर दुबारा नौकरी करने की। 


आज इस ब्लॉग मे हम चर्चा करेंगे की उसी पल या उसी जगह पर होने के क्या फायदे है। किस तरह हम अपने विचारो और भावनाओ के प्रति जागरूक हो सकते है। किस तरह हम अपने दिमाग को शांत और फॉक्स करके अपनी ज़िन्दगी आसान बना सकते है।


कुछ तरीके जिनसे हम वर्तमान समय मे जी सकते है और खुद को शांत और विचारो से अलग कर सकते है। 


1. सांस से शुरुआत करें : एक सांस ही तो है, जब तक चल रही है तब तक हम ज़िंदा है। जिस पल सांस ने हमारा साथ छोड़ा उसी समय आत्मा भी शरीर छोड़ देगी। हमारी ज़िन्दगी दो सांसो के बीच है, एक खत्म होने पर ही दूसरी सांस आती है। 


खुद को विचारो से अलग करने के लिए, कुछ देर के लिए रुके और गहरी साँसे ले। अपनी सांस को बाहर और अपने फेफड़ो तक जाते हुए महसूस करे। जब आप ऐसा कुछ देर के लिए कर लोगे आप खुद को पहले से शांत पाओगे और अच्छा भी महसूस करोगे। 


2. कृतज्ञता का अभ्यास करें : कुछ लोग इसी बात मे भी भगवान का आभार मानते है की जितना उसने दे दिया। वह अगर इसी बात से खुश रहते है और भगवान का आभार प्रकट करते है।  एक दिन ऐसा भी आएगा जिस दिन भगवान की दृष्टि उन पर पड़ेगी और उसी पल से उन सबकी ज़िन्दगी मे सफलता के नए द्वार खुल जायेंगे।


इसके विपरीत जो इंसान कभी किसी का एहसान नहीं मानता, लोग उसको ज्यादा पसंद भी नहीं करते। हम भी अक्सर ये बात कहते ही है की उसके लिए इतना किया एक धन्यवाद तो बोल ही सकता था। हमे ऐसे लोगो से ध्यान हटाकर सकारात्मकता की ओर चलना चाहिए। 


हमे अपनी ज़िन्दगी के लिए भगवान का आभार करना चाहिए। उन सभी सभी चीज़ो का आभार प्रकट करना चाहिए वो चाहे कितनी भी छोटी क्यों ना हो। अपने दोस्तों का भी आभार मानना चाहिए, जो भी आपका मुश्किल समय मे साथ देते है। हमे हर एक चीज़ का और हर एक इंसान का आभार मानना चाहिए क्यूकि वो ज़िन्दगी मे हमे कुछ सीखा रहा है। 


3. अपनी इंद्रियों को सक्रिय करें : हमारे शरीर की 5 महत्वपूर्ण इंद्रिया है, जैसे देखना, सुनना, गंध लेना, स्वाद लेना और त्वचा। इन्ही इन्द्रियों के इस्तेमाल से हम किसी भी चीज़ को देख पाते है, सुन पाते है, उसकी गंध ले पाते है, अपने खाने का स्वाद ले पाते है और हमे स्पर्श का भी पता लगता है। 


अगर हम सब चीज़ो पर ध्यान दे तब हम भी यहाँ और अभी का अनुभव कर सकते है। उदहारण के लिए अगर हम कोई अच्छा गाना सुन रहे है, कहीं बैठकर अपने भोजन का स्वाद ले पा रहे है, या ठण्ड के मौसम मे धूप की गर्मी को महसूस कर पा रहे है। 


4. धीरे-धीरे आगे बढ़ें : हम सभी अपनी ज़िंदगी मे आगे बढ़ना चाहते है, और बहुत ही आगे बढ़ना चाहते है।  कुछ लोग रातों-रात सफल होना चाहते है, उन्हें इस बात से भी फर्क नहीं पड़ता की इससे किसी का फायदा हो रहा है या नुकसान। उन्हें बस आगे बढ़ना है, चाहे कीमत कुछ भी हो। 


परन्तु हमे कुछ समय के लिए रुकना चाहिए और सोचना चाहिए की खुद पर ज्यादा काम का बोझ ना बढ़ाए। एक समय पर एक ही काम को अच्छे तरीके से करे और उसका आनंद ले फिर वो चाहे खाना हो, घूमना हो, या कुछ और करना हो। 


ऐसा करने से हमारा स्वास्थ भी ठीक रहता है और तनाव भी काम होता है।  हम हर एक पल का और मज़ा ले पाते है।  जीवन का असली मतलब समझ ही जब पाते है, जब चीज़े धीरे-धीरे हो।  जल्दबाजी मे हम बस खुद पर एक्स्ट्रा दबाव ही बनाते है।  


5. अपने विचारों का निरीक्षण करें : उसी समय और उसी जगह होने के लिए हमे अपने विचारो पर खास ध्यान देना होगा। हम बैठे तो कहीं और है, और अपने दिमाग मे कहीं और घूम रहे है। उसी जगह होने के लिए विचार का निरीक्षण करना होगा और चीज़ को समझने के लिए पूरी तरह से फोकस करना होगा। 


हमारे विचार पॉजिटिव है, या नेगेटिव और उसी हिसाब से हम उस स्थिति मे फैसला लेंगे। हमे ध्यान देना होगा की क्या हम एक ही विचार के पीछे लगे हुए है, दूसरे पक्ष के बारे मे सोच ही नहीं रहे। ऐसा करने पर हम खुद का बहुत बड़ा नुकसान करवा सकते है।  


विचारो को आकाश मे गुजरते हुए बादलों के रूप मे देखना चाहिए जो आते है और चले जाते है। कभी ये बादल बहुत काले और घने हो जाते है, और कभी बिल्कुल ही साफ।  ऐसा सोचने से हम अपने दिमाग मे नेगेटिव विचारो को अलग कर सकते है।  


6. खुद के प्रति दयालु बनें : कोई भी इंसान गलती नहीं करना चाहता, पर कभी- कभी ना चाहते हुए भी गलती हो सकती है। कुछ लोग लोग गलती को दिल से लगा लेते है, और सारी उम्र उसके बारे सोचते रहते है। गलती एक बार हुई और दुःख उम्र भर का। 


एक बात याद रखनी चाहिए कुछ भी हो जाए, कितनी ही बड़ी गलती क्यों ना हो जाए खुद के साथ हमेशा दयालुता रखनी चाहिए। क्यूंकि गलती किसी से भी हो सकती है।जब भी मुश्किल समय पर गलती हो जाए उस समय खुद से कहना है की जो हुआ हो गया अब नहीं होगा। खुद की गलती की स्वीकार करना चाहिए इससे आंतरिक शांति बढ़ती है।


7. ध्यानपूर्वक सुनने का अभ्यास करें : आज के समय मे हर कोई सुनाने आता है कोई भी सुनने नहीं आता।  परन्तु आपको अपने जीवन मे शांति चाहते हो तो लोगो की बातो को आपको ध्यान से सुनना होगा।  सामने वाले को अपनी बात पूरी बोलने दे बीच मे कभी ना टोके। 


आजकल रिश्ते खराब होने की बड़ी वजह दूसरे की बात को ध्यान से ना सुनना है। अगर आप दूसरे लोगो की बातो को ध्यान से सुनेगे इससे आपके रिश्ते भी अच्छे होंगे और गलतफहमियाँ भी दूर होगी। 


8. दैनिक डायरी बनाएं : अगर हमे अपनी प्रोसेस को मापना है, हमे अपनी दैनिक गतिविधिया देखनी पड़ेगी।  जिस तरह एक्सरसाइज करने से पहले लोग अपना वजन मापते है, और नियमित अंतराल पर दुबारा चेक करते है की वजन कम हुआ या बढ़ा। 


काम मे बिजी होने बावजूद भी खुद को रोककर जाँच करे और खुद को याद दिलाते रहे की सब ठीक है। जो इंसान खुद से बात करता रहेगा वो अपने जीवन मे सफलता जरूर पा लेगा।  ऐसे ही छोटी-छोटी बात ध्यान रखने से हमारी खुद के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।  


यह क्यों महत्वपूर्ण है:

अगर हम जहां है, उसी पल मे रहेंगे उससे हमे तनाव भी कम होगा, क्यूंकि हम उसी समय प्रॉब्लम का समाधान कर सकते है। हमारे फोकस मे भी सूधार होगा। इसकी वजह से आप जल्दी फैसले पर ना पंहुचकर प्रॉब्लम को साफ देख सकेंगे और शांति से उसको सुलझा पाएंगे।  


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