हम डर से कैसे जीत सकते है ?

 इससे पहले वाले ब्लॉग मे हमने डर और डर के प्रकार के बारे मे पढ़ा।  हमने 10 तरह के डर के बारे मे भी पढ़ा जैसे कि जन्मजात डर, सीखा हुआ डर, सामाजिक डर, अस्तित्व संबंधी भय, चिंता विकार, असफलता का डर, नुकसान का डर, परिवर्तन का डर, साथ का डर, दर्द का डर। हम सब इन डरो से अच्छी तरह वाकिफ है , और हम इन सबसे परेशान भी है। 

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हमे इन सब डरो को सामना करना होगा और इस ब्लॉग मे हम यही सीखेंगे की हम डर से कैसे जीत सकते है। हम कैसे अपने डर का सामना करके अपनी सफलता कि राह पर चल सकते है।  उन सपनो को पूरा कर सकते है, जो हमने खुद के लिए देखे है, अपने परिवार के लिए देखे है।  कुछ वादे है, जो खुद से किये है उनको पूरा करना है।  


हम अपने डर के कारण हमेशा अपने सपनो का गला दबाते आ रहे है। परन्तु अब हम अपने डर से नहीं डरेंगे और अपने सभी डरो का सामना करेंगे। हम अपने सपनो को पूरा करके रहेंगे और उस सफलता को पाकर रहेंगे जिसका हमने कभी सपना संजोया था। अब हम पीछे नहीं हटेंगे और अपने सभी कामो को पूरा करेंगे।  


डर हमेशा बुरा नहीं होता, कभी-कभी यह अच्छा भी होता है।  हम कुछ चीज़े अगर डर के कारण छोड़ देते है, तो बहुत सारी चीज़े हम डर के कारण कर भी लेते है।  जैसे कि  हम सबको पता है,अगर हम नहीं पढ़ेंगे तब हमारे अंक भी अच्छे नहीं आएंगे और हमे फेल होने कर डर होता है, हम रातभर भी बैठकर पढ़ते है।  


डर के कारण ही, लोग सुबह उठकर एक्सरसाइज करने जाते है, डर के कारण ही लोग पैसो को बुरे समय के लिए बचाकर रखते है, माता-पिता ध्यान रखते है कि उनके बच्चे बुरी संगत मे ना पड़ जाये उसके लिए बच्चो को अच्छी चीज़े सीखाने कि कोशिस करते है। 


हम अपने डर का सामना करके उनसे कैसे जीत सकते है, उसके कुछ तरीके है जो हम आगे पढ़ेंगे।


1. डर को समझे और स्वीकार करे : जो काम हमे सबसे पहले करना है, वो है डर को समझना। क्यूंकि जब तक हम अपने डर कि वजह को नहीं समझेंगे तब तक हम उसका समाधान भी कर पाएंगे।  एक डॉक्टर भी मरीज का इलाज तभी करता है, जब उसे बीमारी का पता हो वरना बीमारी पता लगाने के लिए काफी सारे टेस्ट करवाता है।   


डर का पता लगा पाना ही सबसे मुश्किल काम है।  उसके लिए हमे अपने डर का सामना करना पड़ेगा और उसकी वजह ढूंढ़नी होगी। जब तक वजह नहीं मिलती हमे ढूंढ़ते रहना पड़ेगा क्यूंकि जब तक ढूंढेगे नहीं तब तक समाधान होगा नहीं। ये चीज़ एक दिन मे तो नहीं पर एक दिन जरूर होगी।  


अब जब हमे इतना ढूढ़ने के बाद डर कि वजह पता लग गयी। अब हमे उससे भी मुश्किल काम करना है और वो है अपनी डर को स्वीकार करना। क्यूंकि जब तक स्वीकार नहीं करोगे तब तक सुधार नहीं हो सकता। बहुत सारे लोगो को कमी पता होती है, पर वो कभी सुधार नहीं करते और हमेशा दुःख उठाते है। पर आपको अपने डर कि वजह ढूंढ़नी भी और स्वीकार भी करनी है, ताकि आप अपने सपनो को पूरा कर सको। 


2.डर को शांत करने की तकनीकें : जब भी डर लगे सबसे पहले हमे खुद को शांत करना होगा और स्वीकार करना होगा कि हमे डर लग रहा है।  सिर्फ इसी एक चीज़ से आपका डर कम हो जायेगा। उसके बाद गहरी सांसे लेना शुरू करे धीरे-धीरे और सांसो को गिनते भी रहे इससे आपके दिमाग को सन्देश जायेगा कि सब ठीक है, और आप डर का सामना कर पाओगे। 


5-4-3-2-1 एक ऐसी तकनीक है जिसे ग्राउंडिंग तकनीक भी कहा जाता है। 5 चीज़ें जो आप देखते हैं, 4 जो आप महसूस करते हैं, 3 जो आप सुनते हैं, 2 जो आप सूँघते हैं, और 1 जो आप चखते हैं, उसका नाम बताएँ। इससे भी आपके दिमाग मे डर कम हो जायेगा और फिर आप खुद से बोल सकते ही कि सबसे बुरा क्या हो सकता है? और उसमे मै क्या कर सकता हूँ।  ऐसा करने से भी आप अपने डर से निकल पाओगे। 


तीसरा जब भी डर लगे उसकी जगह ना बैठे रहे, शरीर को खींचे, चले और तनाव को खुद से दूर भगाएँ।  जो ऊर्जा दिमाग मे और शरीर मे फसी हुई है, उसको बाहर निकलने के लिए। उसके बाद खुद से बात करनी पड़ेगी और खुद को बोलना पड़ेगा कि डर सबको लगता है।  अपने डर का सामना करके ही मैं मजबूत बन सकता हूँ। ऐसा करने से आप मे एक नयी खूबी का विकास होगा, जब भी आपको डर लगेगा आप उसका सामना कर पाओगे। 


3. अपने विचारों को फिर से परिभाषित करें : जब भी हमे डर लगता है हमारा दिमाग अक्सर वास्तविकता को मानना बंद कर देता है, और खराब विचारो  को और बढ़ावा देने लगता है। विचारो को परिभाषित करने का मतलब है, जो हम सोच रहे है उसको सचेत हो कर सोचना। डर कि वजह  से जो विचार दिमाग मे आया कि "मै फेल हो जाऊगा" उसको सोचना कि ये कितना सही और कितना गलत है।  


खुद के विचार को सही करे और खुद के बोले कि मै कोशिश करना नहीं छोडूंगा। आज मै बेसक कम कर रहा हूँ, पर मै सीख सकता हूँ, और आगे बढ़ सकता हूँ। आपके विचारो को आप ही कंट्रोल कर सकते हो। उदाहरण के लिए, "क्या होगा अगर मैं खुद को शर्मिंदा कर दूं?" को "मैं अपना सर्वश्रेष्ठ करूंगा, और यही काफी है" से बदलें।


विचारो को बदलना डर को नकारने कि बजाय उसको सकारात्मक विचारो मे बदलने के बारे मे है। विचारो को बदलने से आप खुद कि ज़िन्दगी मे बहुत बदलाव ला सकते हो और खुद के लिए विकास के नए रास्ते खोज सकते हो । साहस तब शुरू होता है जब डर सकारात्मक दृष्टिकोण से मिलता है।


4. धीरे-धीरे साहस का निर्माण : यह एक ऐसी तकनीक है, जिससे डर को कम किया जा सकता है।  इसमें   डर को टालने कि बजाय, उसे छोटे-छोटे हिस्सों मे उनका सामना करने के बारे है।  जैसे एक पहाड़ को चढ़ने वाला अपनी छोटी-छोटी मंजिल बनता है, और अंत मे अपनी मंजिल पर पंहुच जाता है। 


इस तरीके मे दिमाग को धीरे-धीरे तैयार करते है , पहले एक स्टेप फिर दूसरा और फिर तीसरा।  ऐसा करने से हमारा आत्मविश्वास भी बढ़ता है, और हमारी चिंताए भी कम हो जाती है। हमेशा आगे बढ़ते रहे और अच्छा सोचते रहे। एक बात का ख्याल रहे जल्दबाजी कभी ना करे।  समय का फल मीठा ही होता है। 


5. दूसरो से सहायता ले : जब भी आपको डर लगे, आपको अकेले नहीं रहना है।  क्योकि अकेले मे इंसान और भी ज्यादा डरने लगता है। आपको अपने दोस्तों और परिवार से संपर्क करना है, वो आपकी कमजोरी नहीं ताकत है।  आप खुलकर अपने दिल कि बात उनको बोल सकते हो, जिससे आपको भी डर को देखने का अलग नजरिया मिल सकता है।  

अक्सर लोग मदद मांगने से डरते है, उन्हें लगता है कि लोग उनको कमजोर समझ लेंगे।  आपको इस चीज़ से नहीं डरना कि लोग आपके बारे मे क्या सोचेंगे? आपको सहायता चाहिए आप कॉल करो और बोलो आप कैसा फील कर रहे हो।  जिनको आप अपना दोस्त मानते हो वो आपकी सुनेगा और आपकी सहायता के लिए जरुरु आएगा। 


6. स्व-देखभाल और शारीरिक स्वास्थ्य : ये दोनों इंसान कि शक्ति के स्तंभ है।  जो भी इंसान दोनों चीज़ो पर ध्यान देता है, वो अक्सर शारीरिक और मानसिक (डर) के खिलाफ अच्छा करता है। वह अपने भोजन मे पोषक तत्वों पर भरपूर ख्याल रखता है।  नियमित रूप से एक्सरसाइज करने वाला इंसान तनाव से दूर रहता है और अच्छी नींद लेता है। 


स्व-देखभाल करने वाला इंसान स्वार्थी नहीं होता। वह बस अपने शरीर और दिमाग को ठीक करे स्वस्थ रखना चाहता है। वह ज़िन्दगी मे आने वाली किसी भी चुनौती के लिए खुद को तैयार करता है।  वह दूसरो के मुकाबले अपने जीवन मे बहुत सफल रहता है 


ये कुछ तरीके है, जिनको अपनाकर आप अपने जीवन मे डर से जीत सकते है। उम्मीद करता हूँ, कि आपको मेरा यह ब्लॉग अच्छा लगा होगा। 


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