कहानी एक क़िताब की

 कहानी एक क़िताब की

एक क़िताब महज एक क़िताब नहीं, वह किसी की जिंदगी का एक हिस्सा होता है. जी उसने  काफी लम्बे समय की रिसर्च और मेहनत का नतीजा है. जो उसने दिन-रात की अनगिनत घंटो के बाद वह पन्नो पर छापी है. इस blog मे आपको एक कहानी के सफर की शुरुवात से अंत तक बताने की कोशिश करूँगा.

कहानी एक क़िताब की 

एक क़िताब बनती है, लाखो शब्दों से, उन लाखो शब्दों को लिखने से पहले हज़ारों शब्दों को काटा गया होगा, कुछ शब्दों को दुबारा से लिखा गया होगा. ये कहनी सिर्फ लेखक की नहीं, उन शब्दों की भी है जो उसमे लिखे हुए है, और हर एक शब्द की खुद की एक अलग पहचान है.

 शब्दों से पहले एक विचार होता है, जो लेखक के दिमाग मे होता है, जिसके चारो तरफ कहानी लिखी जाती है. लेखक अपने विचारो को शब्दों के रूप मे एक क़िताब मे लिख देता है, ताकि और भी लोग उसको पढ़ सके और उससे कुछ सीख सके.

 कहानी लिख देना तो मात्र शुरुवात भर है, जैसी जिसको अची लगी लिख दी, मगर कहानी का असली संघर्ष तो उसके बाद ही शुरू होता है, जो शब्द लेखक ने लिखे है, वो किसी क़िताब मे छपने लायक भी है या नहीं?

लेखक अपनी कहानी लिखने के बाद प्रयास करता है, की उसकी वह क़िताब किसी अच्छी पत्रिका मे प्रकाशित हो जाए. वह एक अच्छी पत्रिका की खोज की शुरवात करता है, जब वह उसे मिल जाती है. उसके बाद वह पत्रिका द्वारा दिए गये नियमो के मुताबिक कहानी मे बदलाव करके संपादक को भेजता है, अब कहानी का सफ़र संपादक से आलोचक तक है.

अब लेखक की ज़िम्मेदारी थोड़ी कम हुई, और संपादक की बढ़ गयी. संपादक कुछ दिन उस कहानी को पढता है, और सोचता है कि यह कहानी उसकी पत्रिका के उचित है या नहीं? फिर संपादक एक आलोचक की खोज शुरू करता है, वह कहानी भेजता है, और आलोचक को समय सीमा देता है. अब यह कहानी संपादक से आलोचक के हाथ मे चली गयी. फिर से क़िताब का एक नया सफ़र शुरू होता है.

 आलोचक अपनी महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ देता है, जो उस कहानी को और अच्छा करने मे सहायता करता है, अब फिर वह कहानी फिर से लेखक के पास आती है, सुधार करने के लिए, लेखक पढता है, और परेशान होता है की अब कैसे होगा? पर वो हिम्मत नहीं हारता और आलोचक की हर टिप्पणी का जवाब देने की कोशिश करता है, और दुबारा से सुधार के बाद संपादक के पास जाती है, और संपादक को सब सही लगे वह उसे अगले नए सफ़र के लिए रवाना कर देता है.

 यह नया सफ़र संपादक से प्रकाशन की तरफ, वह कहानी जो विचारो से शब्दों मे, और शब्दों से लाइन्स मे आयी थी वह अब छपने के लिए तैयार है. अब वह कहानी एक अच्छी सी पत्रिका मे पर्काशित होगी, जिसके लिए फिर से बहुत लोग मेहनत करेंगे, उसको पेज पर सेट करने के लिए, एक मशीन का इंतेजाम, इंक का इंतेजाम, और भी बहुत सारी चीजों का.

अब उस कहानी का सफ़र बाजारों मे बिकने का है, लोग आते है, जिसको अच्छी लगती है, वो खरीदते है, अपने बच्चो को सुनाते है, कुछ समय के बाद वह कहानी जो प्रकाशित हुई थी, वह आप रद्दी मे बिकेगी, और रद्दी से किसी रेहड़ी वाले के ठेले पर, वह से नालियो मे और जो कहानी थी, अगर किसी के जहन मे हुई तो बची रहेगी वरना वो भी लाखो कहानियो की तरह गुम हो जाएगी.

नोट: हर एक क़िताब का सम्मान कीजिये, किसी से बहुत मेहनत से लिखी है सिर्फ और सिर्फ आपके लिए ताकि आप वो अनुभव कर सके जो लेखक ने किये है, किसी भी क़िताब को रद्दी मे बेचने से पहले एक बार अपने बच्चो को मेरे इस blog के बारे मे जरुर पढाये.

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