" विश्व फोटोग्राफी दिवस "

 " विश्व फोटोग्राफी दिवस "

" विश्व फोटोग्राफी दिवस "


"मुझे तस्वीरों के बारे में जो पसंद है वह यह है कि वे एक ऐसे पल को कैप्चर करते हैं जो हमेशा के लिए चला गया, जिसे पुन: पेश करना असंभव है।"

कार्ल लजेरफेल्ड


आज विश्व फोटोग्राफी दिवस पर मेरी तरफ से आपको बहुत-बहुत बधाई 


अगर हम विश्व फोटोग्राफी दिवस के इतिहास के बारे मे बात करे, इसकी शुरुआत 1837 से हुई थी. पहली बार फोटोग्राफिक प्रिक्रिया जिसे ‘Daguerreotype’ कहा जाता है. जिसकी खोज फ्रांस मे जोसेफ नाइसफोर और लुई डागुएरे ने की थी. 


" विश्व फोटोग्राफी दिवस "


यह माना जाता है कि
19  अगस्त, 1839 को इस दिन को फोटोग्राफी दिवस के रूप मे मनाया जाने लगा. विश्व की पहली रंगीन फोटो वर्ष 1861 मे खींची गयी, और वर्ष 1957 मे पहली डिजिटल फोटो बनाई गयी थी. उसके बाद से फोटोग्राफी जगत मे क्रांति ही आ गयी है.


फोटोग्राफी के बलबूते आज बहुत सारी कंपनियों ने बहुत सारा पैसा कमाया, और विश्व की कुछ अमीर कंपनियों मे अपनी जगह बना ली है (फेसबुक, इंस्टाग्राम, और कुछ अन्य) . आज यह कंपनिया बैठ कर पैसा कमा रही है, और हम सब लोग सुबह से शाम तक उनको देखते रहते है. कुछ अपनी ही फोटो देख कर खुश रहते है, और कुछ दुसरो की. यही खेल चल रहा है, हम इसे समझ भी रहे है तब भी कुछ नहीं कर पा रहे.


" विश्व फोटोग्राफी दिवस "


फोटो का अर्थ हुआ की जिस पल को हमने कैमरे मे कैद कर लिया
, जो अब कभी कही नहीं जा सकता। यह फोटो हमारे जीवन का हिस्सा बन चुकी है, जब भी हम इसको देखंगे हमारी उस फोटो से जुडी सारी यादें ताजा हो जायेंगी। इसलिए हम सब अक्सर देखते है, कि ख़ुशी के मौके पर फोटोग्राफर का विशेष प्रबंध किया जाता है. ताकि उससे जुडी सब यादें फोटो को देख कर दुबारा याद की जा सके.


आजकल जो कैमरे फोटो लेने के लिए इस्तेमाल किये जाते है, जैसे मोबाइल का कैमरा, DSLR और अन्य।आज कल बहुत सारी अलग-अलग कंपनियों के महंगे से महंगे और सस्ते से सस्ते कैमरे आसानी से मिल जाते है. महंगे और सस्ते के हिसाब से उनकी गुणवत्ता मे बहुत फर्क पड़ता है. अगर कैमरा लेना है, सब कुछ देख परख कर लेना, क्यूंकि इतने पैसे हर बार नहीं खरच किये जा सकते।


अब जिन कैमरों की बात मै करने जा रहा रहा हूँ, एक बार के लिए आप भी उनके बारे मे जानकर हैरान रह जाओगे। मैं मानता हूँ आप इन सबके बारे मे जानते होंगे। परन्तु आज शयद पहली बार इनको एक अलग नजरिये से देखोगे। ऐसे कैमरे जो हमारे शरीर मे लगे है, परंतु इस तरह से नहीं देखे. अब आप सोचने लगोगे की ऐसे कोनसे कैमरे है जो हमारे शरीर मे लगे है, और हमे ही नहीं पता. ये सब  कैमरे जो शरीर मे लगे है, वो काम कैसे करते है? जो भी फोटो ली वह स्टोर कंहाँ हुई? आप आराम से बैठकर पढ़े मैं बताता हूँ.


वह कैमरे है, हमारी आंख, नाक, कान, जीभ और त्वचा। यह सुनकर आप भी हैरान हो रहे होंगे की यह सब कैमरे कैसे हो सकते है? अपने दिमाग पर इतना जोर डालने की जरूरत नहीं है. इस बात को ऐसे समझे जिस तरह कोई भी फोटो या वीडियो बनाते है, यह सब कैमरे मिलकर फोटो और वीडियो बनाते है, जो हमारी यदि बन जाती है. 

" विश्व फोटोग्राफी दिवस "


अब सोचने वाली बात है की फोटो भी खींच ली कर वीडियो भी बना ली
, यह स्टोर कंहाँ होगी? जिस तरह कैमरे और फ़ोन मे मेमोरी का इस्तेमाल होता है, ठीक उसी तरह यह सब हमारे दिमाग की मेमोरी मे सुरक्षित हो जाता है. इसे हम जिस तरह से भी चाहे इस्तेमाल कर सकते है, और जितना हो सके उससे ज्यादा इस्तेमाल कर सकते है. आपको अभी भी लग रहा होगा की मै क्या बोल रहा हूँ


सबसे पहले अगर हम बात कर आँखों की, कुछ लोगो की आँखे अलग-अलग रंग की और बहुत ही खूबसूरत होती है. आंखे के माध्यम से हम सुबह से शाम तक बहुत चीज़े देखते है, जो हमारे दिमाग मे स्टोर हो जाती है. जो फोटो हम दिन या शाम को दखते है वही रात को हमारे सपने मे चलती रहती है. 

" विश्व फोटोग्राफी दिवस "

पुरानी फोटो को देखकर हमारी उनसे जुडी यही सब बाते याद आने लगती है. उसी तरह किसी इंसान, जगह या किसी मशीन को देखकर भी हमारे साथ ऐसा ही होता है. हमारा दिमाग ढूंढ-ढूंढ़कर उनसे जुडी सब बाते हमारे सामने लेकर आने लगता है. कभी यह इंसान हमारे साथ था, हम अच्छे दोस्त थे और भी बहुत सारी चीज़े याद आने लगती है. कई बार हमारे साथ ऐसा होता है कि किसी इंसान को देखकर लगता है, की हम इसे जानते है. उसी एक बड़ी वजह यह है कि हमारा दिमाग इंसानो को देखकर उनकी फोटो को कैद कर लेता है. जब भी किसी इंसान को देखता है, वह दिमाग की स्टोर से ढूंढ़ने लग जाता है, ताकि उससे बात की जा सके.


दूसरा है नाक, अब आप यह सोच रहे होंगे की यह कैसे मुमकिन है? जब भी हम कही जाते है, कुछ जगह से अच्छी सुगंध और कुछ जगह से बहुत बुरी दुर्गंध आ रही होती है. सुगंध और दुर्गंध भी हमारे दिमाग मे फोटो की तरह स्टोर हो जाती है. अगर हम एक बार गुलाब को सूंघते है, उसकी खुश्बू हमारे दिमाग मे छप जाती है. उसके बाद फिर आंख बंद करके सिर्फ सूघने पर पता लग जाता है, कि यह गुलाब है. इसके विपरीत अगर कुछ जलने की दुर्गंध आने पर हमे तुरंत पता लग जाता है की कुछ जल रहा है. हमने देखा नहीं पर जो फोटो नाक ने बनाई थी दिमाग मे उसकी वजह से हम समझ पाए की वहाँ आग लगी थी.

" विश्व फोटोग्राफी दिवस "

तीसरा है कान, अब आप सोच रहे होंगे की आंख, नाक को हमने मान लिया, अब कान कैसे हो सकता है कैमरा? कान हमारा अलग तरह का कैमरा है, यह लोगो की आवाज़ों को कैद करता है. जैसे कोई हमारा दोस्त है, या दुश्मन है, या कोई ऐसा है जिससे हम कभी मिले ही नहीं। कान उन सबकी बातो और आवाज़ों को कैद कर लेता है. हम अक्सर देखते है, जब हमारे फ़ोन पर किसी नंबर से फ़ोन आता है, हम झट से पहचान लेते है कि कौन बोल रहा है. आवाज़ पहचान लेने के बाद हम फिर उनसे बात करने लगते है, वरना यही सोचते रह जाते की किसका फ़ोन था.


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चौथा है जीभ, अब आपके दिमाग मे फिर वही प्रश्न की जीभ कैसे हो सकती है? जीभ एक अलग तरह का कैमरा है, जो स्वाद और बेस्वाद चीज़ो को कैद करती है. कुछ भी अच्छा स्वाद खाने पर हमे उस जगह का याद  रहता है कि इस जगह पर बहुत अच्छा और स्वाद खाने को मिलता है. जब भी हमारा अच्छा खाने का दिल करता है हम दुबारा उसी जगह पर जाते है. जँहा हमे बुरा और बेस्वाद खाना मिलता है, दुबारा उस जगह हम जाने पर भी घबराते है.

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अंतिम है त्वचा, आप सोच रहे होंगे की यह तोह पक्का कैमरा नहीं हो सकती। त्वचा भी एक तरह का कैमरा ही है, जो किसी के छूने को कैद करता है. लड़कियों का यह कैमरा सबसे तेज होता है, उनको छूने भर से सामने वाले के इरादे पता लग जाते है. 


" विश्व फोटोग्राफी दिवस "


कुछ कैमरे ऐसे भी होते है, जो शरीर से नहीं जुड़े होते पर फिर भी हमारी फोटो खींचते रहते है. हम सब उनक उनको जानते है उनको हम पडोसी या कुछ रिश्तेदार भी होते है. जो हमारी फोटो खीचते है, और सोचते है की इन्हे हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है, अगर कभी लड़ाई हुई.


नोट: जो भी इंसान इन सब कैमरों से सही फोटो खींच सकता है, वह अपनी ज़िंदगी मे बहुत सेहतमंद और बहुत तरक्की करेगा। अपने  शरीर के सभी कैमरो को ठीक रखे, तभी आप अपने जीवन मे हमेशा अच्छी फोटो खींच पाओगे। अगर इनमे से कुछ भी खराब हुआ आप हमेशा इस बात को ढूंढ़ने मे लगे रहोगे मगर पहचान नहीं पाओगे। किसी ने बहुत अच्छा लिखा है, मै ता उम्र शीशा साफ करता रहा, मिट्टी तो मेरे चहेरे पर थी. 

 

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