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Consistency is the key to success – how to identify the right and wrong ones?

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"अशुभां पापचरितां दुर्भाषणमुदाहरेत्"।  (गीता 17.15) आज हम फिर मिल रहे है एक नयी चर्चा के लिए जिसका टॉपिक माता-पिता के लिए बहुत जरूरी है। उससे भी ज्यादा जरूरी उन बच्चो के लिए है जिनको नए-नए लोगो से मिलना और नए दोस्त बनाना बेहद पसंद है।   भगवद गीता का श्लोक जो शुरुवात मे लिखा है उसका अर्थ है पापपूर्ण और दूसरों को दुःख देने वाले लोगो से दूर रहे। इसी जैसे और भी जैसे कि चाणक्य द्वारा लिखी चाणक्य नीति के (अध्याय 6, श्लोक 19) मे लिखा है " जैसी संगति, वैसी प्रगति ", बाइबल (1 कुरिन्थियों 15:33) मे भी लिखा है " बुरी संगति अच्छे चरित्र को भ्रष्ट कर देती है ", अरस्तू ने भी लिखा है " आप वही बनते हैं जिनके साथ समय बिताते हैं " और भी बहुत सारे लोगो ने संगति के बारे मे लिखा है।   आज हम भी सकारात्मक और नकारात्मक लोगो कि विशेषताओं के बारे मे चर्चा करेंगे। अगर दोस्त बनाने से पहले हम उनके कुछ गुण और अवगुण देख ले तब हमे फैसला करने मे आसानी होगी।  बाद मे पछतावा करने का कोई फायदा नहीं होगा। जो बीत गया वो पल गया, अब आने वाले समय कि सोच।  सकारात्मक लोगों की विशेषताएं: ...